
छत्तीसगढ़ में माध्यमिक शिक्षा मण्डल की 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं फरवरी से शुरू हो रही हैं। इसके साथ ही मार्च में 5वीं और 8वीं की बोर्ड परीक्षाएं भी आयोजित की जाएंगी। परीक्षाओं के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए राज्य शासन ने बड़ा कदम उठाते हुए ‘एस्मा’ यानी आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम लागू कर दिया है। यह आदेश 15 फरवरी से प्रभावी होगा और 30 अप्रैल तक जारी रहेगा। इस दौरान परीक्षा कार्य से जुड़े शिक्षकों और कर्मचारियों की जिम्मेदारियां बढ़ जाएंगी और वे अनिवार्य सेवाओं से पीछे नहीं हट सकेंगे।
30 अप्रैल तक छुट्टी और आंदोलन पर पाबंदी
लोकहित में जारी इस आदेश के बाद अब आगामी तीन महीनों तक शिक्षक न तो लंबी छुट्टी ले सकेंगे और न ही किसी प्रकार का आंदोलन कर पाएंगे। शासन ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा ड्यूटी और मूल्यांकन कार्य से कोई भी कर्मचारी इनकार नहीं कर सकेगा। यह पाबंदी मूल्यांकन कार्य की समाप्ति यानी 30 अप्रैल तक लागू रहेगी। छत्तीसगढ़ अत्यावश्यक सेवा संधारण अधिनियम 1979 के तहत जारी इस फरमान का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। शासन का मुख्य उद्देश्य छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए परीक्षाओं और रिजल्ट की प्रक्रिया को बिना किसी बाधा के पूरा करना है।
अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सख्त हिदायत
जारी सरकारी आदेश के मुताबिक माध्यमिक शिक्षा मण्डल से जुड़ी सभी सेवाओं को अत्यावश्यक माना गया है। इसमें परीक्षा केंद्रों पर ड्यूटी से लेकर उत्तर पुस्तिकाओं की जांच तक के काम शामिल हैं। विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे सुनिश्चित करें कि परीक्षा कार्य में लगे सभी अधिकारी और कर्मचारी अपने कर्तव्यों का पालन करें। परीक्षाओं के दौरान किसी भी प्रकार की हड़ताल या काम रोकने की कोशिश को अवैध माना जाएगा। इस फैसले से शासन ने साफ कर दिया है कि बोर्ड परीक्षाओं की गोपनीयता और समयबद्धता के साथ कोई समझौता नहीं होगा।



