
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का सीजन खत्म होते ही अब संग्रहण केंद्रों में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। गरियाबंद जिले के देवभोग और गोहरापदर ब्रांच के 22 केंद्रों से भेजे गए लगभग 600 से ज्यादा धान से भरे ट्रकों की पावती (रिसिविंग) अब तक अटकी हुई है। नियम के मुताबिक, ट्रक पहुंचने के 24 घंटे के भीतर पावती दी जानी चाहिए, लेकिन 15 दिन बीत जाने के बाद भी खरीदी केंद्रों को रसीद नहीं मिली है। इस देरी ने अब भ्रष्टाचार और धान की हेराफेरी की आशंकाओं को जन्म दे दिया है।
देवभोग और गोहरापदर केंद्रों का हिसाब फंसा
मामले की गंभीरता को देखते हुए देवभोग ब्रांच मैनेजर अमर सिंह ध्रुव ने अपने उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायत भेजी है। उन्होंने बताया कि अकेले देवभोग ब्रांच के 10 केंद्रों से भेजे गए 362 ट्रकों की पावती का कोई अता-पता नहीं है। यही हाल गोहरापदर केंद्र का भी है। पावती न मिलने का सीधा मतलब है कि खरीदी केंद्रों के पास इस बात का कोई पुख्ता सबूत नहीं है कि उन्होंने कितना धान संग्रहण केंद्र को सौंपा। यदि भविष्य में शॉर्टेज (कमी) निकलती है, तो इसका पूरा ठीकरा खरीदी प्रभारियों पर फोड़ा जाएगा।
नेटवर्क और बिजली की समस्या का दिया गया हवाला
जिले के एकमात्र संग्रहण केंद्र कुंडेल के प्रभारी जगमोहन साहू ने माना कि एंट्री कार्य में काफी देरी हुई है। उनका दावा है कि पहले 1300 ट्रकों की एंट्री रुकी हुई थी, जिसे अब घटाकर आधा कर दिया गया है। प्रभारी ने इसके पीछे बुनियादी समस्याओं का तर्क देते हुए कहा कि पहले मोबाइल इंटरनेट से काम हो रहा था और बिजली कटने से सिस्टम बंद हो जाता था। हालांकि, अब केंद्र में वाई-फाई और इनवर्टर की व्यवस्था कर दी गई है, जिससे आने वाले दिनों में लंबित प्रविष्टियों को जल्द पूरा करने का दावा किया जा रहा है।
वजन के खेल में ‘सेटिंग’ की पुरानी परंपरा
पावती पेंडिंग रखने के पीछे वजन में हेर-फेर का एक बड़ा खेल भी बताया जा रहा है। देवभोग क्षेत्र से संग्रहण केंद्र की दूरी 100 किलोमीटर से अधिक है। हैरानी की बात यह है कि रास्ते के किसी भी धर्मकांटा के वजन को मान्य नहीं किया जाता, बल्कि संग्रहण केंद्र में होने वाले वजन को ही अंतिम माना जाता है। आरोप है कि पावती को रोककर जानबूझकर धान कम दिखाया जाता है और फिर ‘शॉर्टेज’ की भरपाई के नाम पर खरीदी प्रभारियों से सेटिंग की जाती है। ओडिशा सीमा से लगे इन क्षेत्रों में अवैध धान की आवक के कारण यह गोरखधंधा और भी फल-फूल रहा है।
कवर्धा के ‘मुसवा कांड’ और डीएमओ के हटाए जाने की चर्चा
गरियाबंद में इन दिनों कवर्धा के चर्चित ‘मुसवा कांड’ (चूहों द्वारा धान खाने का बहाना) की जमकर चर्चा हो रही है। लोगों को डर है कि कहीं कुंडेल संग्रहण केंद्र में भी स्टॉक की कमी को छिपाने के लिए ऐसी ही किसी मनगढ़ंत कहानी की तैयारी तो नहीं चल रही? इसी बीच जिले के डीएमओ किशोर चंद्रा को अचानक हटा दिया गया है। हालांकि आधिकारिक कारण नियमित उठाव न होना बताया गया है, लेकिन चर्चा है कि चंद्रा की भूमिका कवर्धा कांड में भी संदिग्ध थी और गरियाबंद में भी कोई बड़ी गड़बड़ी सामने आ सकती है।
दबाव में खरीदी प्रभारी, जेल जाने का सता रहा डर
संग्रहण केंद्रों की इस मनमानी से खरीदी प्रभारी भारी मानसिक और आर्थिक दबाव में हैं। पिछले साल देवभोग के केंद्रों में 6753 क्विंटल धान की कमी बताकर प्रभारियों से 2.22 करोड़ रुपये की वसूली की गई थी। झखरपारा में तो 60 लाख रुपये की हेराफेरी के आरोप में एक प्रभारी को जेल तक जाना पड़ा था। प्रभारियों को डर है कि यदि भौतिक सत्यापन (Physical Verification) हुआ और रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिली, तो शासन की गाज उन पर ही गिरेगी, जबकि असली खेल संग्रहण केंद्रों में चल रहा है।



