
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में ‘एग्रीस्टेक’ पोर्टल की बड़ी खामी के चलते लगभग 4,000 किसान समर्थन मूल्य पर अपना धान नहीं बेच पा रहे हैं। किसानों की शिकायत है कि पंजीयन के 24 घंटे बाद भी एकीकृत पोर्टल में उनका रकबा यानी कृषि भूमि का क्षेत्रफल ‘शून्य’ दिखा रहा है। रकबा पंजीयन और संशोधन की अंतिम तिथि 15 दिसंबर थी, जो समाप्त हो गई है। समस्या के समाधान के लिए किसान कलेक्ट्रेट पहुंचकर लगातार ज्ञापन सौंप रहे हैं, लेकिन अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रहे हैं। इस बड़ी लापरवाही पर कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने नाराजगी जताते हुए खाद्य, कृषि और सहकारिता विभाग के अधिकारियों को तत्काल समस्या दूर करने के निर्देश दिए हैं।
डेडलाइन खत्म पर 4000 किसानों का रकबा शून्य, कलेक्टर ने जताई नाराजगी
निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बावजूद जब 4 हजार किसानों का रकबा अपडेट नहीं हुआ, तो कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने तीनों संबंधित विभागों की बैठक बुलाकर धान खरीदी कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से रकबा शून्य दिखाने का कारण पूछा, लेकिन कोई भी अधिकारी ठोस जवाब नहीं दे पाया। कलेक्टर ने इसे बड़ी लापरवाही मानते हुए अधिकारियों को जल्द से जल्द त्रुटि सुधारने और समस्या का समाधान नहीं होने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है, जिससे विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। इस सीज़न में पंजीकृत किसानों की संख्या बढ़ी है, लेकिन रकबा घटने से लक्ष्य अनुरूप धान खरीदी करने में दिक्कत आ सकती है।
किसानों का दर्द: दो बार भौतिक सत्यापन के बाद भी रकबा अपडेट नहीं
परेशान किसान बार-बार जिला प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं। ग्राम बहीगांव के किसान रवि नेताम ने बताया कि गिरदावरी का दो बार भौतिक सत्यापन होने के बावजूद भी एकीकृत पोर्टल में उनका रकबा शून्य दिखा रहा है। इससे केवल उनके गांव के ही 45 किसान धान नहीं बेच पा रहे हैं। इसी तरह, ग्राम कुरमाझर के किसान हरखराम नेताम ने बताया कि खड़ादाह, बासीखाई, डोकाल, बेन्द्रापानी समेत आसपास के करीब 10 गांवों के 200 किसानों का भी रकबा शून्य है और दो बार ज्ञापन सौंपने के बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ है।
30 दिनों में 44 हजार किसानों से 20 लाख क्विंटल धान खरीदी
पोर्टल की समस्याओं के बावजूद जिले में धान खरीदी धड़ाधड़ जारी है। पिछले 30 दिनों में जिले के 100 खरीदी केन्द्रों में 44,351 किसानों से कुल 20 लाख 66 हजार 317 क्विंटल धान खरीदा जा चुका है। इसकी कुल कीमत ₹4 अरब 90 करोड़ से अधिक है। बंपर आवक के चलते 85 से अधिक केन्द्रों में धान का स्टॉक बफर लिमिट से अधिक हो गया है, जिसमें नगरी, घठुला, गट्टासिल्ली, शंकरदाह जैसे उपार्जन केन्द्र शामिल हैं। अब तक 42,682 किसानों को ₹4 अरब 73 करोड़ से अधिक का भुगतान भी किया जा चुका है।
रकबा अपडेट करने की प्रक्रिया: आधार वेरिफिकेशन है जरूरी
भू-अभिलेख शाखा के अधिकारी मधुकर सिरमौर ने रकबा अपडेट करने की प्रक्रिया स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि एग्रीस्टेक में पंजीयन कराने के बाद किसान किसी भी च्वाइस सेंटर से अपने आधार कार्ड नंबर और आधार से लिंक मोबाइल नंबर के माध्यम से वेरिफाई करा सकते हैं। इस प्रक्रिया को पूरा करने के बाद दस्तावेजों को पटवारी और तहसीलदार के पास प्रस्तुत करना होगा ताकि रकबा अपडेट हो सके।



