
छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) का काम तेजी से चल रहा है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 23 दिसंबर 2025 से 18 जनवरी 2026 के बीच विभिन्न राजनीतिक दलों ने सूची की शुचिता जांचने के लिए कुल 38,846 बूथ लेवल एजेंट (BLA) नियुक्त किए हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान अब तक किसी भी राजनीतिक दल ने किसी मतदाता का नाम सूची से हटाने या विलोपन के लिए कोई लिखित आपत्ति दर्ज नहीं कराई है।
भाजपा और कांग्रेस के बीच जमीनी होड़
बूथ स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखी जा रही है। भारतीय जनता पार्टी ने सबसे ज्यादा 20,017 एजेंट तैनात किए हैं, जिनके जरिए अब तक नाम जोड़ने के लिए 228 आवेदन प्राप्त हुए हैं। वहीं, कांग्रेस ने भी अपनी ताकत दिखाते हुए 17,681 एजेंटों की नियुक्ति की है। इसके अलावा क्षेत्रीय दलों में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने 528, बसपा ने 501 और आम आदमी पार्टी ने 119 एजेंटों को इस काम में लगाया है।
आवेदन और सुधार की प्रक्रिया के आंकड़े
मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए निर्वाचन आयोग को भारी संख्या में आवेदन मिल रहे हैं। ड्राफ्ट लिस्ट प्रकाशित होने से पहले फॉर्म-6 के जरिए नए नाम जोड़ने के लिए 55,017 आवेदन आए थे। सूची प्रकाशन के बाद मतदाताओं ने स्वयं आगे बढ़कर सक्रियता दिखाई है, जिसमें नए नाम जोड़ने के लिए 1,37,783 और प्रविष्टियों में सुधार (नाम, पता या फोटो) के लिए फॉर्म-8 के माध्यम से 40,658 आवेदन दर्ज किए गए हैं। विलोपन के लिए भी बड़ी संख्या में आवेदन मिले हैं, जिनकी स्क्रूटनी जारी है।
नाम विलोपन को लेकर स्थिति साफ
निर्वाचन कार्यालय ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि राजनीतिक दलों की तरफ से नाम काटने को लेकर कोई विरोध नहीं आया है। हालांकि, फॉर्म-7 के जरिए व्यक्तिगत स्तर पर विलोपन के लिए 27 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें ऐसे आवेदन भी शामिल हैं जो तकनीकी रूप से सही नहीं पाए गए या जिनका संग्रह नहीं हो सका। आयोग इन सभी आवेदनों की बारीकी से जांच कर रहा है ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से गलती से बाहर न हो जाए।
अंतिम सूची के प्रकाशन की तैयारी
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि प्राप्त सभी आवेदनों पर आवश्यक घोषणाओं और जमीनी सत्यापन की पूर्ति के बाद ही कार्रवाई की जाएगी। सभी दावों और आपत्तियों के निपटारे के बाद ही नामों को अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा। इस पूरी कवायद का उद्देश्य एक ऐसी त्रुटिहीन मतदाता सूची तैयार करना है, जिससे आगामी चुनावों में हर पात्र नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके।



