
छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन सदन का माहौल उस वक्त गरमा गया जब सत्ता पक्ष के ही विधायक ने अपनी सरकार के मंत्री को कटघरे में खड़ा कर दिया। भाजपा विधायक सुनील सोनी ने प्रदेश में लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं का मुद्दा उठाते हुए परिवहन मंत्री केदार कश्यप से तीखे सवाल पूछे। सोनी ने कहा कि सड़कों पर बिछती लाशें अब चिंता का विषय बन गई हैं। विधायक के तेवर इतने सख्त थे कि उन्होंने विभाग की कार्यप्रणाली पर सीधे तौर पर सवालिया निशान लगा दिए, जिससे सदन में कुछ देर के लिए सन्नाटा पसर गया।
चौंकाने वाले आंकड़े: एक साल में करीब 7 हजार मौतें
प्रश्नकाल के दौरान जब सुनील सोनी ने सड़क हादसों में होने वाली मौतों का ब्योरा मांगा, तो परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने जो आंकड़े पेश किए वे डराने वाले थे। मंत्री ने बताया कि बीते एक वर्ष में छत्तीसगढ़ की सड़कों पर कुल 6,898 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। इसका सीधा मतलब यह है कि प्रदेश में हर दिन औसतन 18 से 19 लोग सड़क दुर्घटनाओं का शिकार होकर दम तोड़ रहे हैं। मौतों के इस विशाल आंकड़े ने राज्य में सड़क सुरक्षा के दावों की पोल खोलकर रख दी है।
हादसे रोकने के ‘मास्टर प्लान’ पर मांगा जवाब
विधायक सुनील सोनी ने केवल आंकड़ों पर ही संतोष नहीं किया, बल्कि उन्होंने सरकार से पूछा कि इन मौतों को रोकने के लिए विभाग के पास क्या ठोस ‘मास्टर प्लान’ है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार केवल आंकड़े गिनने के लिए है या हादसों को रोकने के लिए कोई जमीनी कार्रवाई भी की जा रही है। जवाब में परिवहन मंत्री ने कहा कि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं और संवेदनशील इलाकों (ब्लैक स्पॉट्स) की पहचान कर वहां सुधार कार्य किए जा रहे हैं।
राजधानी रायपुर की लचर यातायात व्यवस्था पर सवाल
हादसों के अलावा सुनील सोनी ने राजधानी रायपुर की सुगम यातायात व्यवस्था को लेकर भी मंत्री को घेरा। उन्होंने पूछा कि रायपुर जैसे बड़े शहर में आम जनता के लिए कितनी सिटी बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं? उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि राजधानी के लोगों को सस्ता और सुलभ परिवहन क्यों नहीं मिल पा रहा है। विधायक ने आरोप लगाया कि सिटी बसों का संचालन ठप होने से मध्यम और निम्न वर्गीय नागरिकों को निजी वाहनों या महंगे विकल्पों पर निर्भर होना पड़ रहा है, जो सीधे उनकी जेब पर असर डाल रहा है।
सिटी बसों के सवाल पर निरुत्तर हुए मंत्री
जब विधायक ने शहर में चल रही सिटी बसों की सटीक संख्या पूछी, तो परिवहन मंत्री केदार कश्यप स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। मंत्री ने सदन में कहा कि वे फिलहाल इस संबंध में पूरी जानकारी लेकर ही विस्तार से बता पाएंगे। मंत्री के इस जवाब से असंतुष्ट विधायक ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब विभाग के पास राजधानी की बुनियादी सुविधाओं की ही जानकारी नहीं है, तो मास्टर प्लान कैसे लागू होगा। मंत्री ने आश्वासन दिया कि वे जल्द ही सारी जानकारी जुटाकर सदन पटल पर रखेंगे।
परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे प्रश्नचिह्न
सदन में हुई इस बहस के बाद अब परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली चर्चा का विषय बनी हुई है। अपनी ही पार्टी के विधायक द्वारा सरकार को घेरने से यह साफ हो गया है कि प्रदेश में सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक परिवहन की स्थिति संतोषजनक नहीं है। अब देखना यह होगा कि मंत्री के आश्वासन के बाद क्या रायपुर की सड़कों पर दोबारा सिटी बसें लौटती हैं और क्या सरकार उन ‘ब्लैक स्पॉट्स’ को ठीक करने के लिए कोई समय सीमा तय करती है जहां सबसे ज्यादा हादसे हो रहे हैं।



