
छत्तीसगढ़ के चुनावी इतिहास में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का काम शुरू हुआ है। राज्य के करीब 64 लाख 95 हजार वोटर्स को निर्वाचन आयोग ने नोटिस जारी किया है। यह संख्या प्रदेश के कुल मतदाताओं का लगभग एक चौथाई हिस्सा है। इन सभी वोटर्स के डेटा में कुछ तकनीकी खामियां पाई गई हैं जिन्हें सुधारना अब अनिवार्य हो गया है। आयोग ने साफ कर दिया है कि यदि समय रहते जानकारी अपडेट नहीं की गई तो संबंधित व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट से काट दिया जाएगा।
स्मार्ट सॉफ्टवेयर ने पकड़ी डेटा की बारीक गलतियां
इस बार चुनाव आयोग ने डेटा मिलान के लिए एक एडवांस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया है। इस सिस्टम ने साल 2003 के पुराने रिकॉर्ड की तुलना वर्तमान डेटा से की है। सॉफ्टवेयर ने नाम की स्पेलिंग में मामूली अंतर या शब्दों के बीच के स्पेस जैसी उन गलतियों को भी पकड़ लिया है जिन्हें आमतौर पर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। जैसे अगर किसी का नाम पहले ‘रामकुमार’ था और अब ‘राम कुमार’ दर्ज है तो उसे सुधार के दायरे में रखा गया है।
पिता और पुत्र की उम्र के अंतर पर भी नजर
जांच के दौरान रिश्तों और उम्र के फासले पर भी विशेष कमांड दी गई थी। सॉफ्टवेयर ने उन मामलों को संदिग्ध माना है जहाँ पिता और पुत्र की उम्र में 15 साल से कम का अंतर दिखाई दे रहा है। हालांकि पुराने समय में शादियां जल्दी होने के कारण ऐसे कई मामले सही भी हो सकते हैं लेकिन आयोग अब भौतिक रूप से इनका सत्यापन करना चाहता है ताकि फर्जीवाड़े की कोई गुंजाइश न रहे।
फोटो और पहचान से जुड़ी संदिग्ध जानकारियां
पिछले 22 सालों में कई मतदाताओं के चेहरे के स्वरूप में काफी बदलाव आ गया है। पुरानी फोटो का वर्तमान रिकॉर्ड से मेल न खाना भी नोटिस जारी होने की एक बड़ी वजह है। इसके अलावा यदि किसी एक ही व्यक्ति के नाम पर 6 से ज्यादा वोटर आईडी कार्ड लिंक पाए गए हैं तो उन्हें भी संदेह के घेरे में रखा गया है। आयोग का मकसद केवल उन लोगों को सूची में रखना है जो वास्तव में उस क्षेत्र के निवासी हैं।
14 फरवरी तक सुधार कराने का आखिरी मौका
निर्वाचन आयोग ने डेटा अपडेट करने के लिए 14 फरवरी की तारीख तय की है। जिन लोगों के पास नोटिस पहुंचा है उन्हें इस डेडलाइन से पहले अपने नजदीकी बीएलओ (BLO) से संपर्क करना होगा। आयोग ने इसके लिए 13 प्रकार के पहचान पत्रों को मान्यता दी है जिनमें से कोई भी एक दिखाकर जानकारी सुधारी जा सकती है। यदि कोई मतदाता खुद शहर से बाहर है तो उसके परिवार का सदस्य मूल दस्तावेज दिखाकर यह प्रक्रिया पूरी कर सकता है।
रायपुर और बिलासपुर जिले में सबसे ज्यादा मामले
वोटर लिस्ट में सुधार की इस मुहिम का सबसे ज्यादा असर बड़े शहरों में देखने को मिल रहा है। रायपुर जिला इस सूची में सबसे ऊपर है जहाँ सबसे अधिक नोटिस बांटे गए हैं। इसके बाद बिलासपुर का नंबर आता है जहाँ 5 लाख से ज्यादा मतदाताओं को डेटा ठीक करने के निर्देश मिले हैं। पूरे प्रदेश में हजारों बीएलओ घर-घर जाकर इस काम को पूरा करने में जुटे हैं और इसकी निगरानी सीधे एसडीएम स्तर के अधिकारी कर रहे हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने दी घबराने की जरूरत नहीं
छत्तीसगढ़ के मुख्य निर्वाचन अधिकारी यशवंत कुमार ने जनता से अपील की है कि वे नोटिस मिलने पर घबराएं नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक सामान्य वेरिफिकेशन प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह त्रुटिहीन बनाना है। अगर आपको अब तक कोई नोटिस नहीं मिला है तो इसका सीधा मतलब है कि आपका रिकॉर्ड पूरी तरह सही है और आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं है।
डेडलाइन चूकने पर दोबारा करना होगा आवेदन
अगर कोई मतदाता 14 फरवरी की समय सीमा के भीतर अपने दस्तावेज जमा नहीं कर पाता है तो उसका नाम नई वोटर लिस्ट में शामिल नहीं किया जाएगा। ऐसी स्थिति में उस व्यक्ति का मताधिकार फिलहाल खत्म हो सकता है। नाम कटने के बाद उस व्यक्ति को भविष्य में दोबारा फॉर्म-6 भरकर नए सिरे से आवेदन करना होगा। प्रशासन का कहना है कि मतदान की पारदर्शिता के लिए यह कदम उठाना बेहद जरूरी था।



