
धमतरी जिले के कुरूद ब्लॉक स्थित ग्राम दहदहा के सरकारी मिडिल स्कूल से एक रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है। यहां पढ़ने वाले करीब 35 छात्र-छात्राओं के हाथों पर ब्लेड से कटने के गहरे निशान मिले हैं। जब यह बात गांव वालों और स्कूल प्रबंधन के संज्ञान में आई, तो सबके होश उड़ गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार, शिक्षा विभाग और डॉक्टरों की एक विशेष टीम तुरंत स्कूल पहुंची और बच्चों से पूछताछ की। शुरुआती जांच में यह बात सामने आ रही है कि बच्चों ने किसी नशे के प्रभाव में या फिर एक-दूसरे की देखा-देखी इस आत्मघाती कदम को उठाया है।
15 दिन पुरानी है घटना, अब हुआ खुलासा
बताया जा रहा है कि हाथ काटने की यह सिलसिला काफी दिनों से चल रहा था, लेकिन यह बात 13 फरवरी को खुलकर सामने आई। दहदहा गांव राजिम रोड पर कुरूद से महज 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में नशे का अवैध कारोबार तेजी से फैल रहा है, जिसका असर अब स्कूली बच्चों पर दिखने लगा है। जांच टीम ने पाया कि बच्चों के जख्म अब भरने लगे हैं, जिससे यह साफ होता है कि यह घटना करीब दो से तीन हफ्ते पुरानी है। हालांकि, इतने बड़े पैमाने पर बच्चों का खुद को जख्मी करना पूरे इलाके के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है।
नशे की लत या ‘पीयर प्रेशर’ का नतीजा?
जांच में शामिल स्वास्थ्य विभाग और मनोवैज्ञानिकों की टीम ने इस घटना के पीछे दो मुख्य कारण बताए हैं। कुरूद के बीएमओ डॉ. हेमराज देवांगन का स्पष्ट मानना है कि बच्चों ने नशे की वजह से खुद को चोट पहुंचाई है। काउंसलिंग के दौरान पता चला कि गांव में अवैध शराब के साथ-साथ नशे की गोलियों का चलन भी बढ़ा है। वहीं, दूसरी ओर तहसीलदार सूरज बंछोर का कहना है कि यह ‘पीयर प्रेशर’ यानी एक-दूसरे को देखकर किया गया कृत्य भी हो सकता है। किसी एक बच्चे ने शुरुआत की और बाकी बच्चों ने उसे एक चुनौती या ट्रेंड समझकर अपना हाथ काट लिया।
स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों को मिली कड़ी हिदायत
विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) चंद्रकुमार साहू ने बताया कि मामले की जानकारी मिलते ही 16 फरवरी को स्कूल में पालकों और शिक्षकों की एक आपात बैठक बुलाई गई। सभी 35 बच्चों की विशेष काउंसलिंग कराई गई है ताकि उनके मन से इस तरह के आत्मघाती विचारों को निकाला जा सके। बीईओ ने स्कूल के शिक्षकों को कड़ी फटकार लगाते हुए निर्देश दिए हैं कि वे बच्चों की हर गतिविधि पर पैनी नजर रखें। बच्चों ने बताया कि उन्होंने क्रमिक रूप से एक-दूसरे का अनुसरण करते हुए अपने हाथ जख्मी किए थे, जो स्कूल की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है।
गांव में अवैध नशे के कारोबार पर उठे सवाल
दहदहा और उसके आस-पास के क्षेत्रों में अवैध शराब और नशीली दवाओं की बिक्री एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस और आबकारी विभाग की सुस्ती की वजह से नशे के सौदागर बेखौफ होकर बच्चों तक अपनी पहुंच बना रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि अगर समय रहते नशे की इन गोलियों और अवैध शराब पर लगाम नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में स्थिति और भी भयावह हो सकती है। फिलहाल जिला प्रशासन ने पुलिस को गांव में गश्त बढ़ाने और संदिग्धों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
समाज और अभिभावकों के लिए बड़ी चेतावनी
यह घटना केवल एक स्कूल की समस्या नहीं है, बल्कि समाज और अभिभावकों के लिए एक गंभीर चेतावनी है। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चों में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति और सोशल मीडिया या दोस्तों के बीच ‘कूल’ दिखने की होड़ उन्हें ऐसे खतरनाक रास्तों पर ले जा रही है। विशेषज्ञों ने माता-पिता से अपील की है कि वे अपने बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलावों पर ध्यान दें और उनके साथ संवाद बनाए रखें। दहदहा की इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि बच्चों की मानसिक सेहत और उनके आसपास के माहौल पर नजर रखना अब पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।
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