
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के न्यायधानी बिलासपुर में ऑनलाइन ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस और आम जनता दोनों के होश उड़ा दिए हैं। आमतौर पर ठग फोन पर ओटीपी मांगते हैं या कोई संदिग्ध ऐप डाउनलोड करवाते हैं, लेकिन इस बार बिना किसी संपर्क के ही अकाउंट खाली कर दिया गया। शहर के तारबाहर क्षेत्र स्थित सुमंगलम अपार्टमेंट के रहने वाले युगल किशोर मुंदड़ा (50) गुरुवार रात खाना खाकर सोने की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच उनके मोबाइल पर धड़ाधड़ मैसेज आने लगे। जब तक वे कुछ समझ पाते, उनके खाते से चार किस्तों में कुल 49,998 रुपये पार हो चुके थे। हैरानी की बात यह है कि पीड़ित के पास न तो कोई अनजान कॉल आया और न ही उन्होंने किसी लिंक पर क्लिक किया था।
रिटायर्ड अधिकारी के खाते से पार हुए 5.75 लाख, एपीके फाइल बनी ठगी का जरिया
ठगी का यह अकेला मामला नहीं है। इससे पहले ग्रीन होम्स के निवासी और न्यायालय के रिटायर्ड उपसंचालक गया प्रसाद मालवीय भी बड़े फ्रॉड का शिकार हुए थे। उनके मामले में ठगों ने बेहद शातिर तरीका अपनाया। ठगों ने उनकी पत्नी के व्हाट्सएप पर आरटीओ (RTO) के नाम से एक फर्जी ई-चालान भेजा। यह एक ‘एपीके’ (APK) फाइल थी, जिसे डाउनलोड करते ही मोबाइल का पूरा कंट्रोल ठगों के पास चला गया। इसके बाद जालसाजों ने उनके बैंक खाते से 5 लाख 75 हजार रुपये की भारी-भरकम राशि ट्रांसफर कर ली। इन दोनों ही मामलों ने यह साफ कर दिया है कि ठग अब ई-चालान और तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर लोगों की मेहनत की कमाई पर डाका डाल रहे हैं।
साइबर सेल ने दी चेतावनी, संदिग्ध व्हाट्सएप मैसेज और फाइलों से रहें सावधान
लगातार हो रही इन घटनाओं के बाद बिलासपुर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस की साइबर सेल अब ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और उन सर्वरों का पता लगा रही है जहां से ये पैसे भेजे गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि व्हाट्सएप पर आने वाली अनजान फाइलों को कभी भी डाउनलोड न करें, भले ही वे सरकारी विभाग के नाम से क्यों न हों। युगल किशोर के मामले में पुलिस को अंदेशा है कि यह ‘सिम स्वैपिंग’ या किसी पुराने डेटा लीक का नतीजा हो सकता है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि अगर बैंक खाते से संदिग्ध तरीके से पैसे कटते हैं, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें और बैंक को सूचित कर अपना कार्ड ब्लॉक करवाएं।



