छत्तीसगढ़ में साइबर ठगों की खैर नहीं: इन 9 जिलों में खुलेंगे साइबर थाने, जनवरी से शुरू होगा कामकाज

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में बढ़ते डिजिटल अपराधों पर लगाम कसने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के 9 जिलों में नए साइबर पुलिस थाने खोलने की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। ये थाने बलौदाबाजार, धमतरी, महासमुंद, कोरबा, रायगढ़, राजनांदगांव, कबीरधाम, जांजगीर-चाम्पा और जशपुर में स्थापित किए जाएंगे। पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, इन थानों का संचालन जनवरी 2026 से शुरू होने की उम्मीद है। वर्तमान में राज्य में केवल पांच रेंज स्तरीय साइबर थाने काम कर रहे हैं, जिन पर केसों का भारी दबाव है। नए जिला स्तरीय थानों के खुलने से मामलों की जांच में तेजी आएगी और पीड़ितों को स्थानीय स्तर पर ही तकनीकी मदद मिल सकेगी।

संसाधनों की कमी और तकनीकी चुनौतियां: अस्थाई स्टाफ के भरोसे चल रही जांच

साइबर अपराधों की गुत्थी सुलझाने के लिए विशेष विशेषज्ञता और आधुनिक उपकरणों की जरूरत होती है। वर्तमान में रेंज स्तर के थानों में पदों की कमी के कारण अन्य जिलों से डीएसपी और निरीक्षकों को अस्थाई तौर पर तैनात करना पड़ रहा है। इस व्यवस्था से जांच प्रक्रिया में कई बार तकनीकी बाधाएं आती हैं। अधिकारियों का मानना है कि नए थानों के लिए अलग बजट और समर्पित स्टाफ मिलना बहुत जरूरी है। हाल ही में हुई डीजीपी-आईजीपी कॉन्फ्रेंस में भी इस बात पर जोर दिया गया था कि साइबर अपराधियों से निपटने के लिए पुलिस के पास संसाधनों की कमी है। उम्मीद जताई जा रही है कि मार्च 2026 के आगामी बजट में इन थानों के लिए अलग से फंड जारी किया जाएगा।

हेल्पलाइन से बचे 82 करोड़ रुपये: प्रशिक्षण और धरपकड़ में आई तेजी

प्रदेश में साइबर ठगों के खिलाफ चल रही मुहिम के सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं। विधानसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार, अब तक 2700 से अधिक पुलिसकर्मियों और वकीलों को साइबर अपराधों की बारीकियों के लिए प्रशिक्षित किया जा चुका है। पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए फर्जी सिम बेचने वालों और बैंक खातों का दुरुपयोग करने वाले करीब 1100 से अधिक लोगों को सलाखों के पीछे भेजा है। इसके अलावा, साइबर हेल्पलाइन नंबर 1030 की सक्रियता की वजह से प्रदेश के नागरिकों के करीब 82.5 करोड़ रुपये ठगों के पास पहुंचने से पहले ही बचा लिए गए। प्रशासन ने अब तक 28 हजार से ज्यादा संदिग्ध मोबाइल नंबरों को भी ब्लॉक किया है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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