
छत्तीसगढ़ कांग्रेस में अंदरूनी कलह थमने का नाम नहीं ले रही है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी की सचिव निवेदिता चटर्जी ने अपने पद से इस्तीफा देकर पार्टी के भीतर मचे घमासान को एक बार फिर सड़कों पर ला दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज को भेज दिया है। निवेदिता का जाना कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि वे पिछले एक दशक से अधिक समय से संगठन के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही थीं। उनके इस फैसले ने पार्टी के भीतर नेतृत्व और कार्यशैली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
11 साल का सफर और पद वही: उपेक्षा से आहत थीं निवेदिता चटर्जी
निवेदिता चटर्जी ने अपने इस्तीफे में संगठन के भीतर हो रही अनदेखी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने पत्र में अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए लिखा कि वे साल $2014$ से लगातार पीसीसी सचिव के पद पर काम कर रही हैं। इन $11$ वर्षों में उन्होंने पार्टी के हर उतार-चढ़ाव को करीब से देखा और कठिन परिस्थितियों में भी झंडा थामे रहीं। इसके बावजूद उन्हें कभी भी पदोन्नति या कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी गई। उन्होंने महसूस किया कि उनकी निष्ठा और मेहनत को संगठन में उचित सम्मान नहीं मिल रहा है।
दीपक बैज की तरक्की पर उठाए सवाल: ‘मेरे सामने आए और अध्यक्ष बन गए’
इस्तीफे का सबसे चर्चित हिस्सा वह है जिसमें निवेदिता ने प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के राजनीतिक सफर की तुलना खुद से की है। उन्होंने पत्र में लिखा कि जब वे सचिव थीं तब दीपक बैज ब्लॉक अध्यक्ष हुआ करते थे। उनके देखते-देखते बैज विधायक बने, फिर सांसद चुने गए और अंत में प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुँच गए। निवेदिता ने तंज कसते हुए कहा कि उनके साथ के कई नेता बड़े पदों पर आसीन हो गए लेकिन वे साल $2014$ से आज तक एक ही पायदान पर टिकी रहीं।
निवेदिता चटर्जी के इस्तीफे के मुख्य कारण (Table)
निवेदिता चटर्जी ने अपने पत्र में जिन प्रमुख वजहों का जिक्र किया है, वे इस प्रकार हैं:
| मुख्य बिंदु | शिकायत का विवरण |
| कार्यकाल | पिछले $11$ वर्षों से एक ही पद (सचिव) पर बने रहना। |
| उपेक्षा | वरिष्ठता के बावजूद महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से वंचित रखना। |
| नेतृत्व पर सवाल | कनिष्ठ नेताओं को तेजी से तरक्की मिलना और पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी। |
| समर्थन का अभाव | व्यक्तिगत कठिन समय में पार्टी संगठन से सहयोग न मिलना। |
| अंदरूनी कलह | संगठन के भीतर संवाद की कमी और गुटबाजी का आरोप। |
मुश्किल वक्त में अकेला छोड़ने का आरोप: ‘संघर्ष में साथ रही पर पार्टी ने हाथ खींचा’
निवेदिता ने आरोप लगाया कि जब कांग्रेस सत्ता से बाहर थी और संघर्ष कर रही थी, तब वे पूरी मजबूती के साथ खड़ी रहीं। उन्होंने हर आंदोलन और चुनावी अभियान में अपनी भूमिका निभाई। हालांकि जब उन्हें खुद व्यक्तिगत या राजनीतिक स्तर पर पार्टी के समर्थन और साथ की जरूरत महसूस हुई, तब संगठन ने उनसे किनारा कर लिया। उन्होंने पत्र में साफ लिखा कि कठिन समय में पार्टी ने उनका साथ नहीं दिया जिसकी वजह से वे अब और अधिक समय तक इस अपमानजनक स्थिति में काम नहीं कर सकतीं।

कांग्रेस के भीतर बढ़ता ‘लेटर बम’ कल्चर: दिग्गज नेताओं की बढ़ी चिंता
निवेदिता चटर्जी का इस्तीफा छत्तीसगढ़ कांग्रेस में बढ़ते असंतोष की महज एक कड़ी है। पिछले कुछ महीनों में कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की है। संगठन में अवसरों की कमी और चुनिंदा चेहरों को ही तवज्जो देने के आरोपों ने दीपक बैज की टीम के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते कार्यकर्ताओं की शिकायतों को नहीं सुना गया, तो आने वाले समय में पार्टी को और भी बड़े इस्तीफों का सामना करना पड़ सकता है।
भविष्य की रणनीति पर सस्पेंस: क्या किसी दूसरी पार्टी में शामिल होंगी निवेदिता?
इस्तीफा देने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि निवेदिता चटर्जी का अगला कदम क्या होगा। हालांकि उन्होंने अभी तक किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल होने का संकेत नहीं दिया है, लेकिन उनके तेवरों से साफ है कि वे सक्रिय राजनीति से दूर नहीं रहेंगी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इस मामले में फिलहाल चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन अंदरूनी तौर पर उन्हें मनाने या डैमेज कंट्रोल करने की कोशिशें शुरू हो सकती हैं ताकि आगामी स्थानीय चुनावों पर इसका असर न पड़े।



