
रायपुर: छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार वन मंडल में एक गर्भवती बाइसन (गौर) को क्रूरतापूर्वक मारे जाने की घटना ने वन्य प्राणी विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। शिकार रोकने में वन विभाग की विफलता के बाद, सामाजिक कार्यकर्ता नितिन सिंघवी ने अपर मुख्य सचिव (वन) को पत्र लिखकर प्रशिक्षित स्निफर डॉग स्क्वॉड की तत्काल तैनाती की मांग की है।
हर वन प्रभाग में स्निफर डॉग स्क्वॉड की मांग
Balodabazar News: सामाजिक कार्यकर्ता नितिन सिंघवी ने अपर मुख्य सचिव (वन) को लिखे अपने पत्र में हर वन प्रभाग (Forest Division) में प्रशिक्षित स्निफर डॉग स्क्वॉड तैनात करने पर जोर दिया है। उन्होंने सुझाव दिया है कि वन्यजीव विंग को पर्यटन को बढ़ावा देने के बजाय वन्य जीव संरक्षण और शिकार-विरोधी उपायों पर तत्काल ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
गर्भवती मादा बाइसन की क्रूरतापूर्वक हत्या
सिंघवी ने घटना का जिक्र करते हुए लिखा कि यह दुखद कृत्य दिवाली के ठीक बाद (लगभग 25 अक्टूबर) के आसपास हुआ। बलौदा बाजार वन प्रभाग में शिकारियों ने एक गर्भवती बाइसन (गौर) को क्रूरतापूर्वक मार डाला। शिकारियों ने न केवल बिजली का झटका देकर बाइसन को मारा, बल्कि उसकी पहचान मिटाने के लिए सिर और पैर भी काट दिए।

पूर्व चेतावनी के बावजूद वन विभाग की विफलता
सिंघवी ने वन विभाग की खराब सतर्कता पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिकारियों को अपराध को अंजाम देने के लिए पर्याप्त समय मिला। उन्होंने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ में त्योहारी सीजन के दौरान बढ़ते शिकार के खतरों पर मुख्य वन्यजीव वार्डन (CWLWW) को पहले ही लिखित चेतावनी और अलर्ट जारी किए गए थे, लेकिन उन पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
अनदेखा किया गया स्निफर डॉग तैनाती का सुझाव
सामाजिक कार्यकर्ता ने याद दिलाया कि उन्होंने विशेष रूप से रायपुर के नंदन वन जंगल सफारी में रखे गए स्निफर डॉग को बरनावापारा वन्यजीव अभयारण्य में तैनात करने का सुझाव दिया था, जो बलौदाबाजार डिवीजन के अंतर्गत ही आता है। सिंघवी का मत है कि अगर डॉग स्क्वॉड तैनात होता, तो उसकी उपस्थिति का डर ही निवारक के रूप में काम कर सकता था, जिससे इस निर्दोष बाइसन और उसके अजन्मे बछड़े की जान बच सकती थी।
संरक्षण के बजाय इको-टूरिज्म पर अधिक फोकस
सिंघवी ने वन विभाग के वन्यजीव विंग के रवैये पर गहरी निराशा व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग आज वन्यजीव संरक्षण के मूल काम से भटककर प्रचार-संचालित इको-टूरिज्म परियोजनाओं में अधिक व्यस्त दिख रहा है। उनका कहना है कि वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 वन्यजीवों की सुरक्षा को अन्य सभी उद्देश्यों से ऊपर रखता है, जबकि विभाग का यह दृष्टिकोण इसके विपरीत है।
जनता का विश्वास बहाल करने के लिए ठोस कार्ययोजना
सिंघवी ने अपनी अंतिम अपील में मांग की कि लुप्तप्राय प्रजाति बाइसन का इस तरह मारा जाना एक ‘वेक-अप कॉल’ है। उन्होंने मांग की है कि प्रशिक्षित स्निफर डॉग स्क्वॉड को सभी वन्यजीव अभयारण्यों, राष्ट्रीय उद्यानों और टाइगर रिजर्व में, क्षेत्र और भेद्यता के आधार पर, प्रति प्रभाग न्यूनतम दो कुत्तों के साथ तैनात किया जाए। उनका कहना है कि केवल ऐसे ठोस कदम उठाकर ही विभाग वन्यजीव संरक्षण के प्रति छत्तीसगढ़ की प्रतिबद्धता में जनता का विश्वास बहाल कर सकता है।
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