
CG Land Acquisition Rules 2025: छत्तीसगढ़ सरकार ने भूमि अधिग्रहण और मुआवजा प्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए कलेक्टर गाइडलाइन में संशोधन किया है। भारतमाला प्रोजेक्ट और रेल परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित जमीन में करोड़ों रुपये के मुआवजा फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद यह कदम उठाया गया है।
अब से जमीन अधिग्रहण के बाद मुआवजे की गणना वर्गमीटर (sq.m.) के बजाय हेक्टेयर (hectare) में की जाएगी। साथ ही, अधिग्रहीत भूमि डायवर्टेड हो या नॉन-डायवर्टेड, मुआवजा दोनों के लिए एक समान होगा।
पहले क्या होता था?
पहले के नियमों के अनुसार, डायवर्टेड जमीन पर मिलने वाला मुआवजा बिना डायवर्सन वाली जमीन की तुलना में लगभग ढाई गुना अधिक होता था। इससे कई मामलों में जानबूझकर डायवर्सन कराया जाता था ताकि मुआवजा अधिक मिल सके।
फर्जीवाड़ा कैसे होता था? – एक उदाहरण से समझें
भूमि अधिग्रहण नियमों के अनुसार,
- यदि जमीन 500 वर्गमीटर से कम है तो मुआवजा ज्यादा मिलता है
- और यदि जमीन 500 वर्गमीटर से अधिक है तो मुआवजा कम होता है।
मसलन, यदि 1 एकड़ जमीन (लगभग 4046 वर्गमीटर) का मुआवजा 20 लाख रुपये तय है,
तो उसी जमीन को 500 वर्गमीटर से छोटे टुकड़ों में बांटने पर मुआवजा बढ़कर 1 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि छोटे टुकड़ों का मूल्यांकन बाजार मूल्य (गाइडलाइन रेट) से होता है और टैक्स भी नहीं लगता। यही loophole अब तक बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया जा रहा था।
सरकार का दावा अब होगा पारदर्शी मुआवजा
प्रदेश के वित्त एवं आवास पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि नए नियमों से मुआवजे की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी और अब किसी भी तरह का फर्जीवाड़ा संभव नहीं होगा।
सरकार की यह पहल न केवल सरकारी खजाने की बचत करेगी, बल्कि वास्तविक हितग्राहियों को उचित मुआवजा दिलाने में भी मदद करेगी।
मुख्य बदलाव
| बदलाव | पहले | अब |
|---|---|---|
| मुआवजा गणना | वर्गमीटर में | हेक्टेयर में |
| डायवर्सन का असर | डायवर्टेड जमीन को ज्यादा मुआवजा | दोनों को समान मुआवजा |
| छोटे टुकड़े करने पर | मुआवजा बढ़ जाता था | अब यह loophole बंद |
| टैक्स | मुआवजा टैक्स फ्री | यथावत (लेकिन गलत तरीके से लाभ बंद) |
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