धान खरीदी में फर्जीवाड़ा करने वाले 3 नोडल अफसर सस्पेंड, दफ्तर में बैठकर ही कर दिया था सत्यापन

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में धान खरीदी अभियान के दौरान बड़ी लापरवाही सामने आने पर प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। कलेक्टर बीएस उइके ने धान उपार्जन केंद्रों के निरीक्षण के लिए तैनात तीन नोडल अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने बिना मौके पर जाए और बिना वास्तविक जांच किए ही किसानों के धान का सत्यापन कर दिया। सरकार की इस कार्रवाई से जिले के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। कलेक्टर ने स्पष्ट संदेश दिया है कि किसानों से जुड़ी इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पोखरा केंद्र में उज्जवल शर्मा की घोर लापरवाही

फिंगेश्वर विकासखंड के पोखरा धान उपार्जन केंद्र में तैनात ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी उज्जवल शर्मा पर निलंबन की पहली गाज गिरी है। शर्मा को जिम्मेदारी दी गई थी कि वे किसानों के आवेदनों का भौतिक सत्यापन करें और मौके की तस्वीरें पोर्टल पर अपलोड करें। हालांकि जांच के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि उन्होंने बिना खेतों या समिति का दौरा किए, दफ्तर में बैठकर ही 74 किसानों के आवेदनों का सत्यापन कर दिया। उन्होंने पुराने या गलत फोटोग्राफ्स अपलोड कर प्रविष्टियां दर्ज कर दी थीं, जिसे सेवा नियमों के विरुद्ध मानते हुए सस्पेंड किया गया है।

सांकरा केंद्र में दो अफसरों ने किया फर्जीवाड़ा

धान खरीदी केंद्र सांकरा (छुरा विकासखंड) में भी इसी तरह का खेल चल रहा था। यहां के नोडल अधिकारी रेखराम साहू ने रिकॉर्ड तोड़ लापरवाही दिखाते हुए 129 किसानों के आवेदनों का बिना किसी वास्तविक जांच के सत्यापन कर दिया। आदेश के मुताबिक साहू ने भी दफ्तर की मेज पर बैठकर ही कागजी खानापूर्ति की और समिति के फोटो अपलोड कर दिए। जांच टीम ने जब मिलान किया तो पाया कि भौतिक रूप से कोई जांच की ही नहीं गई थी। इस फर्जीवाड़े के सामने आते ही उन्हें तत्काल सस्पेंड कर दिया गया है।

तीसरे अधिकारी राजकुमार साहू भी नपे

सांकरा केंद्र के ही एक अन्य नोडल अधिकारी राजकुमार साहू पर भी निलंबन की कार्रवाई हुई है। राजकुमार साहू को भी भौतिक सत्यापन का अहम दायित्व सौंपा गया था। उन्होंने भी अपने साथियों के नक्शेकदम पर चलते हुए 57 किसानों के आवेदनों का फर्जी तरीके से सत्यापन कर दिया। कलेक्टर के आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि इन अधिकारियों ने अपने कर्तव्यों के निर्वहन में घोर लापरवाही बरती है, जिससे शासन की योजना में गलत प्रविष्टियां दर्ज होने का खतरा पैदा हो गया।

सिविल सेवा नियमों के तहत की गई कार्रवाई

इन तीनों अधिकारियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-9 के तहत कार्रवाई की गई है। निलंबन की अवधि के दौरान सभी अधिकारियों के मुख्यालय भी बदल दिए गए हैं। उज्जवल शर्मा का मुख्यालय अनुविभागीय कृषि अधिकारी कार्यालय गरियाबंद तय किया गया है, जबकि राजकुमार साहू को जनपद पंचायत छुरा में अटैच किया गया है। प्रशासन अब यह जांच भी कर रहा है कि इस फर्जी सत्यापन के पीछे कहीं कोई बड़ा वित्तीय लाभ लेने की मंशा तो नहीं थी।

धान खरीदी प्रक्रिया की शुद्धता बनाए रखने की चुनौती

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी सरकार के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है। ऐसे में नोडल अधिकारियों द्वारा डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग कर गलत जानकारी दर्ज करना एक गंभीर अपराध माना जा रहा है। अधिकारियों के निलंबन के बाद अब अन्य केंद्रों पर भी जांच तेज कर दी गई है। जिला प्रशासन ने सभी कर्मचारियों को चेतावनी दी है कि धान का दाना-दाना खरीदने की प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है और केवल कागजों पर काम करने वालों के खिलाफ आगे भी ऐसी ही दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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