
छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं की फीस में भारी बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया है। बोर्ड ने लगभग पांच साल बाद शुल्कों में संशोधन किया है, जिससे अब छात्रों को अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी होगी। आखिरी बार वर्ष 2021 में फीस बढ़ाई गई थी। मंडल का तर्क है कि परीक्षाओं के आयोजन और प्रशासनिक खर्चों में हुई वृद्धि के कारण यह फैसला लेना अनिवार्य हो गया था।
नियमित छात्रों के लिए अब ₹800 का शुल्क
नए नियमों के अनुसार, बोर्ड परीक्षा में बैठने वाले नियमित (Regular) छात्रों को अब कुल 800 रुपये परीक्षा शुल्क देना होगा। इससे पहले यह राशि मात्र 460 रुपये थी, जिसमें अब सीधे तौर पर 340 रुपये का इजाफा किया गया है। इस कुल शुल्क में बोर्ड परीक्षा फीस, अंकसूची (मार्कशीट) शुल्क और प्रायोगिक परीक्षा (प्रैक्टिकल) की राशि शामिल है। यह बदलाव अगले सत्र से प्रभावी रूप से लागू कर दिया जाएगा।
आवेदन फॉर्म के दामों में भी हुआ इजाफा
परीक्षा के मुख्य शुल्क के साथ-साथ आवेदन फॉर्म की कीमतों में भी बढ़ोतरी की गई है। पहले छात्रों को बोर्ड परीक्षा फॉर्म के लिए 80 रुपये चुकाने पड़ते थे, जिसे अब बढ़ाकर 150 रुपये कर दिया गया है। हालांकि, मंडल ने राहत देते हुए प्रवेश पत्र (Admit Card) की द्वितीय प्रति के शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया है; यह पूर्व की तरह 80 रुपये ही रहेगा। छात्रों को अब फॉर्म भरते समय ही बढ़ी हुई दर का भुगतान करना होगा।
स्वाध्यायी और बाहरी छात्रों पर अतिरिक्त बोझ
बोर्ड ने केवल नियमित ही नहीं, बल्कि स्वाध्यायी (Private) और राज्य के बाहर से आने वाले छात्रों के शुल्क में भी बड़ी वृद्धि की है। स्वाध्यायी एससी/एसटी छात्रों के लिए पंजीयन और अनुमति शुल्क 560 रुपये से बढ़ाकर 800 रुपये कर दिया गया है। वहीं, छत्तीसगढ़ से बाहर के छात्रों और नए छात्रों के लिए यह राशि 1,540 रुपये से सीधे बढ़कर 2,000 रुपये पहुंच गई है। इससे दूसरे राज्यों से आकर यहां परीक्षा देने वाले छात्रों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा।

22 अलग-अलग मदों में शुल्क वृद्धि को मंजूरी
माशिमं की कार्यपालिका समिति की हालिया बैठक में कुल 22 अलग-अलग श्रेणियों या मदों के शुल्क बढ़ाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई है। इसमें एक विषय की परीक्षा फीस 280 रुपये से बढ़ाकर 400 रुपये और दो विषयों की अवसर परीक्षा (द्वितीय मुख्य परीक्षा) की फीस 340 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये कर दी गई है। मंडल जल्द ही इस संशोधित शुल्क तालिका की आधिकारिक अधिसूचना प्रदेश के सभी स्कूलों को जारी करने वाला है।
अभिभावकों और छात्र संगठनों में विरोध की आशंका
बोर्ड के इस फैसले से मध्यम और गरीब वर्ग के परिवारों पर सीधा असर पड़ना तय है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि फीस में अचानक इतनी बड़ी बढ़ोतरी से छात्र संगठनों और अभिभावक संघों में रोष पैदा हो सकता है। आने वाले दिनों में इस शुल्क वृद्धि के विरोध में मंडल को ज्ञापन सौंपे जाने या प्रदर्शन होने की संभावना जताई जा रही है। अब देखना होगा कि क्या विरोध के स्वर उठने के बाद शासन इस वृद्धि पर दोबारा विचार करता है या नहीं।



