छत्तीसगढ़ में अब स्कूल शिक्षा विभाग के दायरे में प्ले स्कूल, जानें 3 साल से कम उम्र के बच्चों को क्यों नहीं मिलेगा एडमीशन…

छत्तीसगढ़ में अब प्ले स्कूल संचालकों की मनमानी पर रोक लगने जा रही है। राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग ने पहली बार स्पष्ट और सख्त SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) जारी की है, जिसके लागू होते ही 3 साल से कम उम्र के बच्चों का एडमिशन पूरी तरह बंद हो जाएगा। यह निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के अनुरूप है, जो 3 साल की उम्र को फाउंडेशनल स्टेज की शुरुआत मानती है। अब तक ये स्कूल महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) के अधीन थे, लेकिन इस आदेश के बाद प्ले स्कूलों की बागडोर सीधे शिक्षा विभाग ने अपने हाथ में ले ली है।

सभी प्ले स्कूलों के लिए 3 महीने में पंजीयन अनिवार्य, सख्त दिशा-निर्देश जारी

स्कूल शिक्षा विभाग ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि हर प्ले स्कूल को 3 महीने के भीतर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) से रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य होगा। बिना मान्यता के चल रहे प्ले स्कूलों पर नियंत्रण करने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। प्रमुख दिशा-निर्देशों में यह भी शामिल है कि जिस स्कूल में केवल प्री-प्राइमरी तक की पढ़ाई होती है, उन्हें स्कूलों के नाम के साथ “प्ले स्कूल” लिखना अनिवार्य होगा, जिससे अभिभावकों के लिए पारदर्शिता बनी रहे।

स्कूल भवन और सुविधाओं के लिए सख्त नियम, अभिभावक-शिक्षक समिति बनेगी

व्यवस्था में सुधार लाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने स्कूल भवन और सुविधाओं को लेकर सख्त नियम लागू किए हैं। अब हर क्लासरूम हवादार होना, बच्चों के लिए अलग-अलग शौचालय, रेस्ट रूम, साफ पीने का पानी और CCTV लगवाना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, हर प्री-प्राइमरी निजी स्कूल को पालक-शिक्षक समिति बनानी होगी, जिसमें 75% सदस्य अभिभावक और 25% शिक्षक होंगे। इस समिति की बैठक हर 3 महीने में होगी, जिससे व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही बनी रहे।

कम उम्र में प्रवेश पर रोक क्यों? विशेषज्ञ मानते हैं तनाव का कारण

3 साल से कम उम्र के बच्चों को स्कूल भेजने पर रोक लगाने का फैसला बच्चों के मानसिक और सामाजिक विकास को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस उम्र में बच्चे डे-केयर और प्रि-अकादमिक माहौल संभालने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं होते हैं। बहुत छोटे बच्चों को प्ले स्कूल भेजना तनाव और ओवरस्टिम्यूलेशन का कारण बन सकता है, जबकि 3 साल की उम्र संरचित शिक्षा के लिए अधिक उपयुक्त मानी जाती है। यह नियम राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करेगा।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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