
छत्तीसगढ़ बंद के दौरान कांकेर जिले का आमाबेड़ा इलाका एक बार फिर हिंसा की चपेट में आ गया है। ताजा मामला एक धर्मांतरित महिला के घर पर हमले का है। ग्रामीणों के एक समूह ने महिला पर अपने मूल धर्म में लौटने का दबाव बनाया। जब महिला ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि उसे डर है कि धर्म बदलने से वह फिर से बीमार पड़ जाएगी, तो भीड़ उग्र हो गई। आक्रोशित लोगों ने महिला के घर पर हमला बोल दिया और छत व दीवारों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। इस घटना ने इलाके में फिर से सांप्रदायिक तनाव पैदा कर दिया है, जबकि एक दिन पहले ही स्थानीय चर्च के एक नेता ने हिंदू धर्म में वापसी की थी।
क्या है विवाद की असली जड़? शव दफनाने से शुरू हुआ था बवाल
कांकेर में तनाव की शुरुआत 16 दिसंबर 2025 को हुई थी, जब बड़े तेवड़ा गांव के निवासी चमरा राम सलाम की मृत्यु हुई। मृतक के पुत्र, जो गांव के सरपंच हैं, उन्होंने पिता के शव को अपनी निजी जमीन पर दफना दिया था। कुछ ग्रामीणों ने दफन की प्रक्रिया और मौत के कारणों पर संदेह जताते हुए शव को बाहर निकालने की मांग की। इसी मांग को लेकर गांव दो गुटों में बंट गया और जमकर पत्थरबाजी हुई। इस संघर्ष में निजी संपत्तियों को काफी नुकसान पहुंचा था, जिसके बाद से ही पूरे बस्तर संभाग में धर्मांतरण के मुद्दे पर उबाल है।
हिंसा के बाद सरकार का कड़ा रुख: एसपी पर गिरी गाज
कांकेर में बिगड़ती कानून व्यवस्था और लगातार हो रही हिंसा को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल किया है। सरकार ने जिले के एसपी इंदिरा कल्याण ऐलेसेला को पद से हटाकर छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (सरगुजा) भेज दिया है। उनकी जगह अब 2019 बैच के आईपीएस अधिकारी निखिल अशोक कुमार रखेचा को कांकेर का नया पुलिस कप्तान बनाया गया है। निखिल रखेचा इससे पहले गरियाबंद जिले में एसपी के रूप में तैनात थे। शासन की इस कार्रवाई को जिले में शांति बहाली में विफलता के रूप में देखा जा रहा है।
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सुरक्षा व्यवस्था सख्त: नए एसपी के सामने शांति की चुनौती
नए पुलिस अधीक्षक की नियुक्ति के बाद आमाबेड़ा और आसपास के गांवों में सुरक्षा बल की तैनाती बढ़ा दी गई है। पुलिस की प्राथमिकता अब उन उपद्रवियों की पहचान करना है जिन्होंने महिला के घर में तोड़फोड़ की और माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। बस्तर में चल रहे इस विवाद के कारण आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। प्रशासन अब दोनों पक्षों के प्रमुख लोगों से बातचीत कर बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है ताकि हिंसा का यह दौर थम सके।



