
21 June Longest Day: आज यानी 21 जून का दिन खगोलीय घटनाओं में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए बेहद खास है। आज साल का सबसे लंबा दिन और सबसे छोटी रात दर्ज की जा रही है। देश के मध्य भाग में स्थित भोपाल में आज दिन की अवधि 13 घंटे 34 मिनट की रहेगी। इस विशेष खगोलीय घटना को लेकर नेशनल अवॉर्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने एक जागरूकता कार्यक्रम के जरिए आम लोगों को इसके पीछे के वैज्ञानिक कारणों की जानकारी दी।
जानिए क्या है ग्रीष्म संक्रांति का वैज्ञानिक कारण
सारिका घारू ने मॉडल के जरिए समझाया कि आज के दिन पृथ्वी का उत्तरी ध्रुव सूर्य की तरफ लगभग 23.5 डिग्री झुका होता है। विज्ञान की भाषा में इस भौगोलिक स्थिति को ग्रीष्म संक्रांति या ‘समर सॉल्सटिस’ कहा जाता है। इस स्थिति के बनते ही सूर्य की सीधी किरणें धरती पर मौजूद कर्क रेखा पर बिल्कुल लंबवत यानी सीधी पड़ती हैं। यही वजह है कि सूर्य की रोशनी धरती के इस हिस्से पर सबसे ज्यादा समय तक रहती है और दिन की अवधि साल में सबसे अधिक हो जाती है।

आज से शुरू होगा दक्षिणायन और छोटे होने लगेंगे दिन
आज के इस बड़े बदलाव के बाद अब सूर्य की स्थिति धीरे-धीरे दक्षिण की तरफ खिसकने लगेगी, जिसे पारंपरिक और वैज्ञानिक भाषा में ‘दक्षिणायन’ कहा जाता है। इसके शुरू होते ही कल से दिन की अवधि धीरे-धीरे छोटी होने लगेगी और रातें लंबी होने लगेंगी। यह खगोलीय बदलाव मौसम में आने वाले परिवर्तन का भी संकेत देता है, जिसके बाद धीरे-धीरे बारिश और फिर ठंड की दस्तक का रास्ता साफ होता है।
जीरो शैडो डे को लेकर विज्ञान प्रसारक ने दूर किया भ्रम
सारिका घारू ने इस दौरान ‘जीरो शैडो डे’ यानी परछाई गायब होने की घटना को लेकर फैले भ्रम को भी साफ किया। उन्होंने बताया कि जीरो शैडो डे की स्थिति केवल उन्हीं जगहों पर बनती है जो बिल्कुल कर्क रेखा के ऊपर स्थित हैं। मध्य प्रदेश सहित कर्क रेखा के दक्षिण में आने वाले इलाकों में यह घटना अप्रैल और मई के महीने में ही हो चुकी है। वहीं, दिल्ली, जम्मू और कश्मीर जैसे देश के सुदूर उत्तरी शहरों में यह खगोलीय स्थिति कभी नहीं बनती।

मध्य प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी छोर में समय का बड़ा अंतर
मध्य प्रदेश के बड़े भौगोलिक विस्तार के कारण राज्य के अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में काफी अंतर देखा गया। आज प्रदेश में सबसे पहले सूर्योदय पूर्वी हिस्से के सिंगरौली में सुबह 5:12 बजे हुआ। वहीं, सबसे आखिरी में सूर्यास्त पश्चिमी छोर पर स्थित नीमच में शाम 7:22 बजे दर्ज किया गया। इस तरह मध्य प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी जिलों के बीच समय का करीब 32 मिनट का अंतर सामने आया।
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य की इस मजबूत स्थिति का महत्व
खगोल विज्ञान के साथ-साथ ज्योतिषीय दृष्टि से भी इस दिन को बेहद खास माना गया है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मा, मान-सम्मान, ऊर्जा और सफलता का कारक ग्रह माना जाता है। जानकारों के मुताबिक, जब सूर्य कर्क रेखा पर सबसे मजबूत स्थिति में होता है, तो यह इंसानी जीवन में सकारात्मक बदलाव, दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास के बढ़ने का प्रतीक बनता है। इस समय को लोग नई शुरुआत के लिए शुभ मानते हैं।

सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति का विशेष अवसर
धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार, 21 जून का दिन ब्रह्मांड से विशेष ऊर्जा प्राप्त करने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इस दिन सूर्य से निकलने वाली सकारात्मक किरणें मानव मन और प्रकृति में संतुलन बनाने का काम करती हैं। यही कारण है कि इस समय योग, ध्यान और साधना के जरिए लोग अपनी आंतरिक शक्ति को मजबूत करते हैं। इसे जीवन में नई प्रेरणा और मानसिक शांति हासिल करने के अवसर के रूप में देखा जाता है।
कर्क रेखा पर सूर्य की सीधी किरणों से बदलती है ऋतु
इस पूरे खगोलीय घटनाक्रम का सीधा असर पृथ्वी के पर्यावरण पर पड़ता है। जब सूर्य कर्क रेखा के ठीक ऊपर होता है, तो उत्तरी गोलार्ध में गर्मी अपने चरम पर होती है। लेकिन इसके बाद जैसे ही सूर्य की किरणें तिरछी होनी शुरू होती हैं, वैसे ही हवा के दबाव और तापमान में बदलाव आने लगता है। यही बदलाव भारत में मानसून के आगे बढ़ने और ऋतु परिवर्तन में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है।



