
नई दिल्ली: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने शुक्रवार को सर्वसम्मति से रेपो दर में 0.25 आधार अंकों (bps) की कटौती करके इसे 5.25 प्रतिशत कर दिया है। यह बदलाव तत्काल प्रभाव से लागू होगा। RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इसकी घोषणा की। रेपो दर वह ब्याज दर होती है, जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को धन उधार देता है, इसलिए इस कटौती का सीधा असर होम और कार सहित सभी प्रकार के बैंक लोन पर पड़ेगा, जिससे उनकी ईएमआई कम हो सकती है।
मजबूत आर्थिक वृद्धि और कम मुद्रास्फीति बना कटौती का आधार
दिसंबर की नीति बैठक में दरों में कटौती का फैसला मजबूत आर्थिक विकास और बेहद कम मुद्रास्फीति के माहौल में लिया गया। वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) की जुलाई-सितंबर तिमाही (Q2) में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि 8.2 प्रतिशत रही, जो RBI के अनुमान से अधिक है। उधर, खुदरा मुद्रास्फीति (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक – CPI से मापी जाती है) अक्टूबर में घटकर 0.25 प्रतिशत पर आ गई। इसका कारण खाद्य पदार्थों की रिकॉर्ड निचले स्तर पर कीमतें और हालिया GST कटौतियाँ रहीं।
FY26 के लिए विकास दर का अनुमान बढ़ाया गया
MPC ने मौद्रिक नीति का रुख ‘तटस्थ’ बनाए रखा है। केंद्रिय बैंक ने FY26 के लिए विकास दर (ग्रोथ) के अनुमान को बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत कर दिया है, जो अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। वहीं, मुद्रास्फीति के अनुमान को घटाकर 2.6 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे पहले अक्टूबर की बैठक में MPC ने रेपो दर को 5.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा था।
लगातार तीन कटौतियों के बाद फिर मिली राहत
इस कटौती से पहले फरवरी से लगातार तीन बार में रेपो दर में 100 आधार अंकों (प्रतिशत का सौवां भाग) की कटौती की जा चुकी थी। इन कटौतियों से फरवरी में रेपो दर 6.5 प्रतिशत से घटकर 5.5 प्रतिशत पर आ गई थी। ताजा कटौती के बाद अब यह 5.25 प्रतिशत पर आ गई है, जिससे अर्थव्यवस्था में पैसे का प्रवाह बढ़ने की संभावना है।



