
बालोद जिले के दल्लीराजहरा फारेस्ट रेंज में वन भूमि पर हुए बड़े कब्जे के खिलाफ प्रशासन ने मोर्चा खोल दिया है। सुकड़ीगहन गांव के पास कंजेलीबीट इलाके में सैकड़ों एकड़ जंगल को साफ कर अवैध तरीके से खेत बना लिए गए थे। वन विभाग ने पुलिस और राजस्व विभाग के साथ मिलकर संयुक्त अभियान चलाया और जे़सीबी मशीनों की मदद से खेतों के मेड़ों को तोड़ना शुरू कर दिया। इस कार्रवाई से इलाके के अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मच गया है क्योंकि वन संपदा को उजाड़कर यहां लंबे समय से कृषि कार्य किया जा रहा था।

पारधी समुदाय के कब्जे से मुक्त कराई गई जमीन
अधिकारियों के अनुसार यह पूरा मामला सुकड़ीगहन गांव के पारधी समुदाय के कुछ लोगों से जुड़ा है। इन लोगों ने 279 हेक्टेयर के एक बड़े हिस्से में पेड़ों की कटाई कर जमीन को समतल कर दिया था। वन मंडलाधिकारी अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि करीब 200 एकड़ से अधिक के घने जंगल को काटकर उसे खेतों में तब्दील कर दिया गया था। शुरुआती चरण में टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद लगभग 30 एकड़ भूमि को कब्जे से मुक्त करा लिया है। विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक पूरे वन क्षेत्र से अवैध कब्जा हट नहीं जाता।
वन अमले की सुस्ती पर भी उठे गंभीर सवाल
इस बड़ी कार्रवाई के बीच वन विभाग की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में है। स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि जब सैकड़ों एकड़ में पेड़ों की बलि दी जा रही थी और रातों-रात खेत तैयार किए जा रहे थे तब जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे थे। इतने बड़े पैमाने पर अवैध कटाई एक दिन में मुमकिन नहीं है। अब जब ग्रामीण वहां खेती शुरू कर चुके हैं तब विभाग उन्हें बेदखल करने पहुंचा है। इस देरी की वजह से न केवल पर्यावरण का भारी नुकसान हुआ बल्कि अब प्रशासनिक अमले को भी जनता के कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

घंटों तक चला ग्रामीणों का विरोध और बहस का दौर
जैसे ही जंगल में बुलडोजर चलने की खबर गांव पहुंची सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। ग्रामीणों ने अधिकारियों का रास्ता रोककर कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे रोजी-रोटी का संकट बताया। अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच घंटों तक तीखी बहस चलती रही। वन विभाग के अफसरों ने स्पष्ट कर दिया कि नियमों के उल्लंघन और जंगल की तबाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। काफी समझाने के बाद ग्रामीण वहां से हटे लेकिन उन्होंने कलेक्टर से मिलकर अपनी शिकायत दर्ज कराने की बात कही है।

सुरक्षा के कड़े घेरे में जारी रही बेदखली की मुहिम
कार्रवाई के दौरान टकराव की आशंका को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। वन विभाग के सैकड़ों कर्मचारियों के साथ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी खुद पूरी स्थिति की निगरानी कर रहे थे। प्रशासन ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया था। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि सरकारी काम में बाधा डालने या वन संपदा को दोबारा नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने वालों पर सख्त कानूनी शिकंजा कसा जाएगा। फिलहाल शेष अतिक्रमण को हटाने के लिए विभाग ने चरणबद्ध योजना तैयार की है।



