
Raksha Bandhan 2025: धमतरी से रक्षाबंधन से पहले एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। बीजेपी महिला मोर्चा की कार्यकर्ता हर साल की तरह इस बार भी सीएएफ कैंप में तैनात जवानों की कलाई पर राखी बांधने पहुंची थीं, लेकिन इस बार परंपरा टूट गई। महिलाओं को कैंप से यह कहकर लौटा दिया गया कि कार्यक्रम की उन्हें कोई सूचना नहीं मिली है। इससे नाराज महिला कार्यकर्ताओं ने नगरी एसडीओपी कार्यालय के बाहर धरना दे दिया।
सूचना के अभाव में लौटाई गई बहनें
Raksha Bandhan Dhamtari Jail: प्रदर्शन कर रहीं महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने सीतानदी और बहीगांव सीएएफ कैंप सहित थानों में राखी कार्यक्रम के लिए सूचना भिजवाई थी। पूर्व में जनपद उपाध्यक्ष और महिला मोर्चा पदाधिकारियों ने एएसपी शैलेंद्र पांडे, जो वर्तमान में एसडीओपी नगरी के प्रभारी भी हैं, से मुलाकात कर सूचना देने का आग्रह किया था।
Dhamtari News: हालांकि एसडीओपी ने कहा था कि वे संबंधित कैंपों को सूचना भेज देंगे। लेकिन जब महिलाएं सीतानदी सीएएफ कैंप पहुंचीं तो वहां मौजूद अधिकारियों ने साफ कह दिया कि उन्हें किसी कार्यक्रम की जानकारी नहीं दी गई है।
धरने पर बैठी महिलाएं, पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी
SDOP Office Protest: बिना राखी बांधे लौटना महिला कार्यकर्ताओं को नागवार गुज़रा। उन्होंने एसडीओपी कार्यालय नगरी के बाहर धरना शुरू कर दिया। इस दौरान पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी हुई। लगभग एक घंटे तक महिलाएं धरने पर बैठी रहीं। उनका कहना था कि जवानों की कलाई इस बार सूनी रह गई, जबकि वे 25 सालों से हर रक्षाबंधन पर उन्हें राखी बांधती आ रही हैं।
जेल में मनाया रक्षाबंधन, बंदी भाईयों की कलाई सजी राखी से
BJP Mahila Morcha: जहां एक ओर जवानों को राखी नहीं बांधी जा सकी, वहीं धमतरी नगर निगम की भाजपा महिला पार्षदों ने जिला जेल में बंद बंदियों के साथ रक्षाबंधन मनाया। महिलाएं जेल पहुंचीं और वहां बंदी भाईयों को राखी बांधी, मिठाई खिलाई। इस भावनात्मक पल के दौरान बंदी भाइयों ने बहनों से वादा किया कि वे जेल से बाहर निकलकर समाज में अच्छे काम करेंगे और अपराध का रास्ता छोड़ देंगे।
9 अगस्त को है रक्षाबंधन, लेकिन मन में रह गया एक सवाल
CAF Camp Rakhi: रक्षाबंधन 2025 का शुभ मुहूर्त 9 अगस्त को है, लेकिन उससे पहले धमतरी की यह घटना कई सवाल छोड़ गई है। क्या प्रशासन ने जानकारी देने में चूक की? क्या राजनीति ने परंपरा को तोड़ दिया? या बस यह एक ‘गलतफहमी’ थी जो सालों पुरानी एक भावनात्मक पहल को बीच में ही रोक गई?



