
छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची को दुरुस्त करने का काम तेजी से चल रहा है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत दावों और आपत्तियों का पहला दैनिक बुलेटिन जारी कर दिया है। 23 दिसंबर 2025 से शुरू हुआ यह सिलसिला 22 जनवरी 2026 तक चलेगा। 24 दिसंबर की शाम तक के आंकड़ों के अनुसार, राज्य की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट, जिसमें वर्तमान में 1 करोड़ 84 लाख 95 हजार 920 मतदाता दर्ज हैं, उसमें नाम जोड़ने के लिए राजनीतिक दलों ने भारी उत्साह दिखाया है। निर्वाचन आयोग पूरी प्रक्रिया की बारीकी से निगरानी कर रहा है ताकि आगामी चुनावों से पहले एक सटीक और पारदर्शी सूची तैयार की जा सके।
भाजपा और कांग्रेस में मची होड़: जानिए किस पार्टी ने कितने दावे किए
मतदाता सूची में अपने समर्थकों के नाम जुड़वाने के लिए भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के बूथ लेवल एजेंटों (BLA) के माध्यम से अब तक कुल 38,846 आवेदन प्राप्त हुए हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान किसी भी दल ने किसी मतदाता का नाम हटाने (बहिष्करण) के लिए कोई दावा पेश नहीं किया है। पार्टियों की ओर से मिले आवेदकों का विवरण इस प्रकार है:
- भारतीय जनता पार्टी (BJP): 20,017 दावे
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC): 17,681 दावे
- बहुजन समाज पार्टी (BSP): 501 दावे
- जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे): 528 दावे
- आम आदमी पार्टी (AAP): 119 दावे
नाम काटने की प्रक्रिया: 27 लाख से अधिक आवेदन पहले से लंबित
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के प्रकाशन से पहले ही आयोग को बड़े पैमाने पर नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 प्राप्त हुए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 27 लाख 40 हजार 759 आवेदन नाम विलोपन के लिए मिले हैं। इनमें वे प्रविष्टियां भी शामिल हैं जो तकनीकी रूप से त्रुटिपूर्ण या अप्राप्य पाई गई हैं। हालांकि, नई ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद अभी तक आम जनता की ओर से सीधे तौर पर नाम जोड़ने (फॉर्म-6) या हटाने (फॉर्म-7) के लिए कोई नया स्वतंत्र आवेदन पोर्टल पर दर्ज नहीं हुआ है। आयोग का पूरा ध्यान फिलहाल उन प्रविष्टियों को हटाने पर है जो मतदाता सूची की शुद्धता को प्रभावित कर रही हैं।

अधूरे फॉर्म होंगे निरस्त: आयोग ने आवेदकों को दी चेतावनी
निर्वाचन आयोग ने साफ कर दिया है कि मतदाता सूची में नाम जुड़वाने या सुधार करवाने के लिए केवल निर्धारित फॉर्म ही मान्य होंगे। किसी सादे कागज पर दी गई शिकायत या अधूरे शपथ पत्र को दावे की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धाराओं का हवाला देते हुए अधिकारियों ने बताया कि हर आवेदन के साथ जरूरी दस्तावेजों और घोषणा पत्र का होना अनिवार्य है। सभी वैध दावों की फील्ड रिपोर्ट और भौतिक सत्यापन के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। जो भी दावे सही पाए जाएंगे, उनके नाम 21 फरवरी 2026 को प्रकाशित होने वाली अंतिम मतदाता सूची में शामिल कर लिए जाएंगे।



