विश्व आदिवासी दिवस पर छत्तीसगढ़ सरकार कटघरे में, मुख्यमंत्री डुप्लीकेट आदिवासी, ऐसा जनता को होता है महसूस: बीएस रावटे, सर्व आदिवासी समाज ने उठाए तीखे सवाल

रायपुर: विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज ने सरकार के रवैये को लेकर नाराजगी जताई। समाज ने आरोप लगाया कि राज्य में आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बावजूद सरकार इस दिवस को लेकर गंभीर नहीं है और इसका विरोध कर रही है। कार्यकारी अध्यक्ष बीएस रावटे ने मुख्यमंत्री पर तीखा हमला करते हुए कहा कि लोगों को अब ऐसा महसूस हो रहा है कि वे असली नहीं, बल्कि “डुप्लीकेट आदिवासी” हैं।

सरकार पर आदिवासी समाज का आरोप

बीएस रावटे ने कहा कि राज्य सरकार आदिवासियों के मुद्दों को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्व आदिवासी दिवस को लेकर सरकार की चुप्पी इस बात का संकेत है कि उसे आदिवासियों की भावनाओं से कोई लेना-देना नहीं है। उनका कहना है कि जब संयुक्त राष्ट्र ने इस दिन को मान्यता दी है और दुनियाभर के 193 देश इसे आदिवासियों के अधिकारों के प्रतीक दिवस के तौर पर मना रहे हैं, तो भारत और खासकर छत्तीसगढ़ सरकार इसे क्यों नहीं मना रही?

जल-जंगल-जमीन के मुद्दे पर चिंता

रावटे ने यह भी कहा कि आदिवासियों का जीवन जल, जंगल और जमीन से जुड़ा है, लेकिन सरकार इन संसाधनों को कंपनियों के हवाले कर रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार आदिवासी इलाकों में जमीन की बिक्री और जंगलों के दोहन पर रोक लगाए।

जनगणना में आदिवासियों की अनदेखी

सर्व आदिवासी समाज ने जनगणना को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि 1951 के बाद से आदिवासियों की अलग जनगणना नहीं की जा रही है। यह कोशिश है कि आदिवासी पहचान को धीरे-धीरे मिटा दिया जाए। उन्होंने कहा कि अगर देश की आबादी बढ़ रही है, तो आदिवासियों की संख्या क्यों स्थिर बनी हुई है?

धर्मकोड और पहचान की मांग

रावटे ने आदिवासी धर्म को मान्यता देने और जनगणना में अलग “आदिवासी” कॉलम बनाने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि आदिवासियों की पहचान को बरकरार रखने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए यह जरूरी है।

भारत ने खुद माना था आदिवासियों को मूल निवासी

रावटे ने बताया कि भारत सरकार ने 1957 में संयुक्त राष्ट्र को लिखित में दिया था कि भारत के आदिवासी ही यहां के मूल निवासी हैं। लेकिन 1987 में भारत से गए प्रतिनिधिमंडल ने इसका खंडन कर दिया, जिससे आदिवासी समाज की असल पहचान पर सवाल खड़े हो गए।

सरकार से जवाब की मांग

सर्व आदिवासी समाज ने साफ कहा कि आदिवासियों को केवल चुनावी मुद्दा न बनाया जाए। सरकार को चाहिए कि वह उनके अधिकारों और विकास को लेकर ठोस नीति बनाए और विश्व आदिवासी दिवस जैसे अहम अवसर पर सम्मानजनक भागीदारी सुनिश्चित करे।

Also Read: भाजपा संगठन में बड़ी सर्जरी की तैयारी: मूणत को मिल सकती है नई जिम्मेदारी, अभिषेक, नवीन महामंत्री की दौड़ में सबसे आगे

दक्षिण कोसल का Whatsapp Group ज्वाइन करे

Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

Related Articles

Back to top button