
छत्तीसगढ़ में इस वर्ष धान खरीदी अभियान तेज रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार के ताज़ा अपडेट के अनुसार अब तक 149.25 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है। खाद्य एवं राजस्व विभाग की सचिव रीना बाबासाहेब कंगाले ने बताया कि समर्थन मूल्य पर खरीदी की सीमा को 15 क्विंटल से बढ़ाकर 21 क्विंटल कर दिया गया है, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिली है। सरकार ने अब तक 25 लाख 49 हजार किसानों से धान खरीदा है और उन्हें ₹34,348 करोड़ का भुगतान किया गया है, जिसमें लगभग ₹12 हजार करोड़ की अतिरिक्त राशि भी शामिल है, जो किसानों की आय बढ़ाने के प्रयासों को दर्शाता है।
25 लाख किसानों को ऑनलाइन सिस्टम से मिला भुगतान
सरकार ने स्पष्ट किया कि धान खरीदी से जुड़े सभी भुगतान ऑनलाइन बैंकिंग सिस्टम के जरिए किए जा रहे हैं, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है और किसानों को समय पर राशि मिलती है। इस साल कुल 26 लाख 49 हजार किसान पंजीकृत हैं। खरीदी के शुरुआती चरण में ही 77 क्विंटल धान 1 लाख 17 हजार 500 किसानों से खरीदा गया और ₹1,150 करोड़ का भुगतान किया गया। केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य 6 लाख 38 हजार मीट्रिक टन था।
भीड़ कम करने के लिए लागू हुई “तुम्हार टोकन” योजना
धान खरीदी प्रक्रिया को सुचारू और सुविधाजनक बनाने के लिए सरकार ने “तुम्हार टोकन” (Tumhar Token Scheme) योजना लागू की है। अब तक 3,000 से अधिक टोकन जारी किए जा चुके हैं। लगभग 23 लाख किसान, जिनकी भूमि 5 एकड़ से कम है, इस श्रेणी में आते हैं और उन्हें प्राथमिकता टोकन मिलेंगे। टोकन सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक केंद्रों पर उपलब्ध रहेंगे। किसान मोबाइल ऐप के माध्यम से भी टोकन प्राप्त कर सकते हैं, और जिन किसानों के पास टोकन नहीं है, वे केंद्र जाकर तत्काल टोकन ले सकते हैं, जिससे भीड़ कम करने में मदद मिल रही है।
समितियों को कमीशन आधारित व्यवस्था के तहत मिलेगा भुगतान
धान खरीदी संचालन का जिम्मा संभालने वाली समितियों को सरकार कमीशन आधारित संरचना (Committee Commission System) पर भुगतान करती है। पिछली साल कुल 2,200 समितियों को ₹450 करोड़ जारी किए गए थे। इस वर्ष भी यही व्यवस्था लागू रहेगी ताकि खरीदी केंद्रों का संचालन सुचारू बना रहे। यह व्यवस्था समितियों को उत्प्रेरित करती है और खरीदी प्रक्रिया की दक्षता बनाए रखने में सहायक है।
किसानों को बड़ी राहत: खरीदी सीमा 21 क्विंटल हुई
सरकार ने समर्थन मूल्य पर खरीदी की सीमा को 15 क्विंटल से बढ़ाकर 21 क्विंटल प्रति एकड़ कर दिया है, जो किसानों के लिए एक बड़ी राहत है। इस निर्णय से किसानों को अपनी उपज का अधिक हिस्सा सरकारी समर्थन मूल्य पर बेचने का अवसर मिला है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होने की संभावना है। किसानों को समय पर और ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था ने प्रक्रिया में विश्वास बढ़ाया है।



