
छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी की समस्या अब एक विकराल रूप ले चुकी है। पिछले दो वर्षों के भीतर प्रदेश में बेरोजगार युवाओं की संख्या में भारी उछाल आया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जहां अप्रैल 2024 में पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या 11.39 लाख थी, वहीं दिसंबर 2025 तक यह बढ़कर 15.47 लाख के पार पहुंच गई है। महज दो साल के भीतर 4 लाख से अधिक युवाओं का इस सूची में जुड़ना राज्य की आर्थिक और सामाजिक स्थिरता के लिए खतरे की घंटी है।
सरकारी सुस्ती: महीने भर में 17 हजार बेरोजगार, नौकरी मिली सिर्फ 400 को
राज्य में रोजगार सृजन की रफ्तार बेहद सुस्त नजर आ रही है। आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि हर महीने औसतन 17 हजार नए युवा रोजगार कार्यालयों में अपना नाम दर्ज करा रहे हैं। इसके विपरीत, सरकार हर महीने औसतन केवल 400 युवाओं को ही नौकरी दे पाने में सफल रही है। भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और निजी क्षेत्र में नए निवेश की कमी ने इस खाई को और चौड़ा कर दिया है, जिससे युवाओं में भारी निराशा है।
जिलों का हाल: दुर्ग और बिलासपुर में सबसे ज्यादा युवा खाली हाथ
बेरोजगारी के मामले में प्रदेश के बड़े जिले सबसे आगे हैं। दुर्ग जिला इस सूची में शीर्ष पर है, जहां 1.70 लाख से ज्यादा युवा काम की तलाश में हैं। इसी तरह बिलासपुर में भी आंकड़ा 1 लाख के पार है। चौंकाने वाली बात यह है कि स्वयं रोजगार मंत्री के गृह जिले रायपुर में भी 88 हजार से ज्यादा बेरोजगार पंजीकृत हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि शहरी क्षेत्रों में औद्योगिक क्लस्टर होने के बावजूद स्थानीय युवाओं को पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहे हैं।
बेरोजगारी में टॉप 10 जिले (CG Unemployment Data)
| स. क्र. | जिले का नाम | बेरोजगारों की संख्या |
| 1 | दुर्ग | 1,07,031 |
| 2 | बिलासपुर | 1,00,373 |
| 3 | जांजगीर-चांपा | 95,907 |
| 4 | बालोद | 88,982 |
| 5 | रायपुर | 87,855 |
| 6 | राजनांदगांव | 84,903 |
| 7 | धमतरी | 66,719 |
| 8 | महासमुंद | 58,051 |
| 9 | जशपुर | 52,960 |
| 10 | कबीरधाम | 50,151 |
| – | कुल प्रदेश (सभी जिले) | 15,47,857 |
औद्योगिक नीति की विफलता: स्थानीय युवाओं को नहीं मिल रहा हक
छत्तीसगढ़ में कोयला और बिजली उत्पादन की बड़ी कंपनियां सक्रिय हैं, लेकिन वे स्थानीय लोगों को रोजगार देने की शर्त को पूरा करने में कोताही बरत रही हैं। रायगढ़ और तमनार जैसे इलाकों में कोल ब्लॉक होने के बावजूद वहां की बड़ी कंपनियों जैसे जिंदल, हिंडाल्को और अंबुजा सीमेंट में स्थानीय नियुक्तियों की संख्या काफी कम है। सरकार की औद्योगिक नीति में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने का नियम होने के बाद भी कंपनियां वादे निभाने में पीछे हैं।

इन कंपनियों ने इतनों को दिया रोजगार
| कंपनी का नाम | नौकरियों की संख्या |
| अंबुजा सीमेंट | 1,142 |
| हिंडाल्को इंडस्ट्रीज | 301 |
| छत्तीसगढ़ पॉवर जनरेशन कार्पोरेशन | 217 |
| जिंदल पॉवर (यूनिट 1) | 181 |
| जिंदल पॉवर (यूनिट 2) | 143 |
| सारडा एनर्जी | 142 |
| जिंदल स्टील | 128 |
| महाराष्ट्र विद्युत उत्पादन कंपनी (महाजेनको) | 21 |
बजट से आस: क्या वित्त मंत्री के सूटकेस से निकलेगा कोई ठोस समाधान?
अब सबकी निगाहें 24 फरवरी को पेश होने वाले साय सरकार के तीसरे बजट पर टिकी हैं। प्रदेश के 15 लाख बेरोजगारों को उम्मीद है कि वित्त मंत्री ओपी चौधरी इस बार ‘ज्ञान-गति’ के मॉडल के साथ कोई ऐसा ठोस रोजगार रोडमैप पेश करेंगे जो केवल कागजों तक सीमित न रहे। युवाओं को इंतजार है कि क्या इस बजट में सरकारी भर्तियों के लिए कोई समयबद्ध कार्यक्रम या निजी क्षेत्र में स्थानीय अनिवार्य भागीदारी जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे।



