
छत्तीसगढ़ के धमतरी और गरियाबंद जिले की सीमा पर स्थित उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों के शिकारियों के खिलाफ बड़ी कामयाबी मिली है। अखिल भारतीय बाघ गणना 2026 के काम में जुटी वन विभाग की टीम को नागेश बीट के कोर एरिया में कुछ संदिग्ध लोग हथियार लेकर घूमते दिखे थे। एंटी पोचिंग टीम ने घेराबंदी कर तीन आरोपियों को दबोच लिया है। पूछताछ में पता चला कि ये लोग 13 से 16 जनवरी तक जंगल के भीतर छिपे हुए थे और वन्यप्राणियों के शिकार की फिराक में थे। मुख्य आरोपी गुप्ताराम पहले भी साल 2017 में शिकार के मामले में जेल की हवा खा चुका है।
नाले में पानी पीने आए जंगली सुअर को मारी थी गोली
जांच में खुलासा हुआ कि 16 जनवरी की सुबह गोमारझरी नाला के पास जब जंगली सुअरों का झुंड पानी पीने आया, तब आरोपियों ने भरमार बंदूक से एक सुअर को मार गिराया। इसके बाद आरोपी शिकार को प्लास्टिक की बोरी में भरकर अपने गांव टांगापानी ले गए और आपस में कच्चा मांस बांट लिया। वन विभाग और गरियाबंद पुलिस की साइबर सेल ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए जब आरोपियों के घर और बाड़ी की तलाशी ली, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए।
आरोपियों के पास से जब्त सामान की सूची
वन विभाग ने आरोपियों के पास से शिकार में इस्तेमाल होने वाले खतरनाक हथियारों के साथ वन्यजीवों के अवशेष बरामद किए हैं। जब्त की गई सामग्रियों की सूची इस प्रकार है:
- हथियार: 2 नग भरमार बंदूक और बंदूक बनाने के कलपुर्जे (ट्रिगर)।
- वन्यजीव अवशेष: 3.100 किलो जंगली सुअर का मांस और भालू का पंजा।
- शिकार के औजार: लोहे के छर्रे, खरगोश पकड़ने का फंदा और क्लच वायर का जाल।
- अन्य सामग्री: कुल्हाड़ी, हंसिया, छूरी और जंगल में ठहरने का सामान।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की गंभीर धाराओं में केस दर्ज
पकड़े गए आरोपियों में गुप्ताराम (42 वर्ष), भादुराम (40 वर्ष) और राजमन (30 वर्ष) शामिल हैं। विवेचना अधिकारी धर्मेंद्र सिंह सोनवानी ने बताया कि इन सभी पर वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं (9, 27, 29, 31, 34, 50, 51) के तहत अपराध दर्ज किया गया है। 22 जनवरी को आरोपियों को गरियाबंद कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में अनाधिकृत प्रवेश और हथियार लेकर घूमना एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
ओडिशा के तीन फरार शिकारियों की तलाश जारी
इस गिरोह में कुल 6 लोग शामिल थे, जिनमें से तीन आरोपी ओडिशा राज्य के रहने वाले बताए जा रहे हैं। फिलहाल वैनुराम और उसके दो अन्य साथियों की पतासाजी की जा रही है। वन विभाग का मानना है कि पकड़े गए शिकारियों से पूछताछ में अंतरराज्यीय शिकार गिरोह के बारे में और भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। इस पूरी कार्रवाई में गरियाबंद पुलिस के साइबर सेल प्रभारी सतीश यादव और वन विभाग के नोडल अधिकारी गोपाल कश्यप सहित पूरी टीम की अहम भूमिका रही।



