
छत्तीसगढ़ की साय सरकार किसानों को उनकी मेहनत का पूरा मोल देने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रही है। राज्य के संकल्प के मुताबिक किसानों को धान का रिकॉर्ड 3100 रुपये प्रति क्विंटल मूल्य दिया जा रहा है जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। लेकिन हाल के दिनों में धान खरीदी की दैनिक सीमा (लिमिट) कम होने की वजह से केंद्रों पर भीड़ बढ़ रही थी और किसानों को अपनी बारी का लंबा इंतजार करना पड़ रहा था। किसानों की इस परेशानी को देखते हुए सुकमा जिला प्रशासन ने धान खरीदी की लिमिट को कई गुना बढ़ाने का आदेश जारी कर दिया है। इस फैसले से अब मंडियों और केंद्रों पर धान की आवक तेजी से संभाली जा सकेगी।
एक दिन में 51 हजार क्विंटल से ज्यादा की खरीदी: तीन गुना हुई क्षमता
सुकमा जिला प्रशासन द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार धान खरीदी केंद्रों की दैनिक क्षमता में भारी इजाफा किया गया है। पहले जिले में हर दिन मात्र 15102 क्विंटल धान खरीदने की सीमा तय थी जिससे टोकन और तौल में समय लग रहा था। अब इस लिमिट को बढ़ाकर 51800 क्विंटल प्रतिदिन कर दिया गया है। यानी अब जिले के केंद्रों पर पहले के मुकाबले तीन गुना से भी ज्यादा धान रोज खरीदा जा सकेगा। सरकार के इस निर्णय से उन किसानों को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी जो अपनी फसल लेकर केंद्रों पर खड़े थे और लिमिट खत्म होने के डर से परेशान थे।

एग्रीस्टेक और रकबे की समस्या का भी होगा निपटारा
जिला खाद्य अधिकारी रवि कोमरा ने बताया कि खरीदी की सीमा बढ़ने से उपार्जन केंद्रों पर काम की गति तेज होगी और किसानों को सीधा फायदा मिलेगा। इसके साथ ही प्रशासन उन किसानों की समस्याओं पर भी ध्यान दे रहा है जिनका रकबा डिजिटल रिकॉर्ड यानी एग्रीस्टेक में कम दिखाई दे रहा था। इस तकनीकी समस्या को दूर करने के लिए भौतिक सत्यापन (पी.वी. ऐप) का सहारा लिया जा रहा है। प्रशासन ने इस संबंध में आवश्यक सुधारों के लिए शासन को पत्र भी भेज दिया है ताकि किसी भी पात्र किसान को धान बेचने में दिक्कत न आए।

टोकन की टेंशन खत्म और भौतिक सत्यापन पर जोर
राज्य सरकार ने किसानों की सुविधा के लिए टोकन व्यवस्था को पहले ही सरल बना दिया है ताकि उन्हें दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। अब खरीदी की दैनिक सीमा बढ़ने से तौल और उठाव के काम में जो सुस्ती थी वह भी दूर हो जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन किसानों के रकबे में विसंगति है उनका सत्यापन प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। सुकमा जिले में लिया गया यह फैसला आसपास के अन्य क्षेत्रों के किसानों के लिए भी एक बड़ी उम्मीद लेकर आया है जिससे धान खरीदी का लक्ष्य समय पर पूरा होने की संभावना बढ़ गई है।
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