छत्तीसगढ़ में अतिथि व्याख्याता भर्ती प्रक्रिया पर विवाद, सरकार ने रोक लगाई

Guest Lecturer CG Recruitment Process: छत्तीसगढ़ में कॉलेजों में अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति को लेकर उठे विवाद ने अब गंभीर रूप ले लिया है। Dakshin Kosal ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था, जिसके बाद यह मामला प्रदेशभर में बहस का विषय बन गया। सरकार ने भी तुरंत संज्ञान लेते हुए अतिथि व्याख्याता भर्ती प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया है। साथ ही संभागवार जांच समिति गठित कर दी गई है, जिसे सात दिनों के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।

नियमों में बदलाव से नाराजगी बढ़ी

हाल ही में जारी आदेश के अनुसार अतिथि व्याख्याता भर्ती प्रक्रिया में अब केवल समान अंक होने की स्थिति में छत्तीसगढ़ के अभ्यर्थियों को प्राथमिकता मिलेगी। पहले के नियमों में स्थानीय उम्मीदवारों को सीधी प्राथमिकता दी जाती थी। इस बदलाव के बाद बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों को बराबरी का मौका मिल गया है। नतीजतन, प्रदेश के NET और SET पास युवाओं में गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है।

अभ्यर्थियों की आपत्ति

इस बदलाव को लेकर अभ्यर्थियों ने कई सवाल उठाए हैं।

  • “जब हम यहीं पढ़ाई करते हैं, यहीं की परीक्षाएं पास करते हैं, तो नौकरी में पहला हक हमारा क्यों नहीं?” – मानसी बाजपेई, अभ्यर्थी
  • “मैं तीन बार NET-SET क्वॉलिफाई कर चुका हूं, फिर भी सूची में नाम तक नहीं आता।” – भानुप्रताप साहू, NET पास अभ्यर्थी

इन नाराज अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार के नए नियम स्थानीय युवाओं के साथ अन्याय कर रहे हैं।

संघ ने लगाया आरोप

छत्तीसगढ़ अतिथि व्याख्याता संघ ने आरोप लगाया है कि कई कॉलेजों के प्राचार्यों ने मनमाने तरीके से बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों को नियुक्त कर लिया। संघ का कहना है कि पहले जहां स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता मिलती थी, अब उनकी अनदेखी की जा रही है। इससे न केवल प्रदेश के योग्य उम्मीदवारों का हक मारा जा रहा है, बल्कि बाहर से आने वाले उम्मीदवारों को अनुचित लाभ मिल रहा है।

मंत्री टंकराम वर्मा का जवाब

जब इस विवाद पर उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा से सवाल किया गया कि “क्या स्थानीय विद्यार्थियों को मौका नहीं दिया जा रहा? पहले स्थानीय को प्राथमिकता थी, अब बाहरी राज्यों को समान दर्जा मिल गया है?” तो मंत्री ने जवाब दिया:

“छत्तीसगढ़ सरकार के जो नियम बने हैं, उनमें मूल रूप से स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देना ही है। कुछ जगहों से शिकायतें मिली हैं कि भर्ती में गड़बड़ी हुई है। इन्हीं शिकायतों की जांच के लिए प्रक्रिया को अस्थायी रूप से स्थगित किया गया है। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।”

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि “यह कहना गलत है कि बाहरी उम्मीदवारों को मौका दिया जा रहा है। नियम में साफ लिखा है कि छत्तीसगढ़ के अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी। शिकायतों के बाद ही जांच समिति बनाई गई है और जांच रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।”

Guest Lecturer CG Recruitment Process विवाद से जुड़ी अहम बातें

  • उच्च शिक्षा विभाग ने संभागवार जांच समिति गठित की है।
  • भर्ती प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आदेश जारी किया गया है।
  • सात दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
  • जहां नियुक्ति हो चुकी है, वहां फिलहाल रोक लागू नहीं होगी।

आगे क्या?

इस विवाद ने न केवल भर्ती प्रक्रिया को सवालों के घेरे में ला दिया है, बल्कि स्थानीय बनाम बाहरी उम्मीदवारों की बहस को भी हवा दी है। फिलहाल प्रदेश के हजारों अभ्यर्थी सरकार की जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार पुराने नियमों के तहत स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता वापस देगी या फिर नए संशोधित नियमों को ही लागू करेगी।

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