रायपुर में आय से अधिक संपत्ति का मामला:पूर्व सर्वेयर राकेश रमन सिंह को 3 साल की सजा, 2.09 करोड़ की असमानुपातिक संपत्ति साबित

अंबिकापुर की विशेष अदालत ने पूर्व सर्वेयर राकेश रमन सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को सही माना है। न्यायाधीश ने आरोपी को तीन साल की सख्त जेल की सजा के साथ 11 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया है। साल 2007 में छत्तीसगढ़ एसीबी ने सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। लंबी न्यायिक प्रक्रिया और ठोस सबूतों के आधार पर अब जाकर इस केस का निपटारा हुआ है जिससे यह साफ हो गया है कि कानून की पकड़ से बचना मुमकिन नहीं है।

आय से 185 प्रतिशत ज्यादा मिली संपत्ति

एसीबी की जांच में जो आंकड़े सामने आए वह चौंकाने वाले थे। जांच अधिकारियों ने पाया कि राकेश रमन सिंह की अपनी नौकरी के दौरान वैध स्रोतों से कुल कमाई करीब 1.12 करोड़ रुपये होनी चाहिए थी। इसके उलट जब उनके खर्चों और जमा की गई संपत्तियों का हिसाब लगाया गया तो वह 3.22 करोड़ रुपये निकला। इस तरह उनके पास अपनी घोषित आय से 2.09 करोड़ रुपये अधिक मिले। यह उनकी वास्तविक आय से लगभग 185 प्रतिशत ज्यादा थी जिसे वह अदालत में साबित नहीं कर पाए।

छापेमारी में मिले थे भ्रष्टाचार के कच्चे चिट्ठे

इस पूरे मामले की शुरुआत एसीबी द्वारा की गई छापेमारी से हुई थी। जांच टीम ने जब आरोपी के ठिकानों पर दबिश दी तो बड़ी संख्या में अचल संपत्ति के दस्तावेज और निवेश के कागजात बरामद हुए थे। इन वित्तीय रिकॉर्ड्स की बारीकी से पड़ताल करने के बाद अभियोजन पक्ष ने अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखा। जब्त किए गए दस्तावेजों ने यह साबित करने में अहम भूमिका निभाई कि एक सरकारी पद पर रहते हुए आरोपी ने आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं ज्यादा धन संचित किया था।

कोर्ट ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर सुनाया फैसला

विशेष न्यायालय ने इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और गवाहों के बयानों का मिलान किया। अदालत ने पाया कि भ्रष्टाचार के जरिए कमाई गई संपत्ति का अंतर इतना बड़ा था कि उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। दस्तावेजों की प्रामाणिकता और गवाहों की गवाही ने पूर्व सर्वेयर की मुश्किलों को बढ़ा दिया। अदालत ने माना कि लोक सेवक रहते हुए आय से अधिक संपत्ति अर्जित करना समाज और व्यवस्था के प्रति गंभीर अपराध है और इसी आधार पर सजा का निर्धारण किया गया।

भ्रष्टाचार के पुराने मामलों पर कसता शिकंजा

कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला उन लोगों के लिए एक कड़ा सबक है जो यह सोचते हैं कि वक्त गुजरने के साथ उनके पुराने केस दब जाएंगे। राज्य में भ्रष्टाचार के पुराने मामलों की फाइलें अब तेजी से खुलने लगी हैं और एसीबी लगातार कार्रवाई कर रही है। राकेश रमन सिंह के मामले में आया यह फैसला यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध चल रही जांच में भले ही वक्त लग जाए लेकिन अंत में न्याय की ही जीत होती है।

प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता का संदेश

अंबिकापुर कोर्ट के इस निर्णय को प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में एक बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार और जांच एजेंसियां अब उन अधिकारियों पर पैनी नजर रख रही हैं जो अपने पद का दुरुपयोग कर अवैध कमाई में जुटे हैं। इस तरह की सजा से विभाग के अन्य कर्मचारियों के बीच भी एक कड़ा संदेश गया है। भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन के लक्ष्य को पाने के लिए न्यायिक सक्रियता और एसीबी की मुस्तैदी को लोग जरूरी मान रहे हैं।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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