
रायपुर। छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए सुप्रीम कोर्ट का आदेश बड़ी राहत लेकर आया है। अब भूमि अधिग्रहण के मामलों में प्रभावित किसानों को अतिरिक्त मुआवज़ा और विशेष क्षतिपूर्ति मिलेगी। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि दो माह के भीतर भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापना प्राधिकरण को पूरी तरह सक्रिय किया जाए और लंबित मामलों पर सुनवाई शुरू हो।
प्राधिकरण वर्षों से ठप, किसानों को नहीं मिल पा रहा था लाभ
राज्य में कई जिलों में भूमि अधिग्रहण तो हो चुका था, लेकिन 2013 के कानून के तहत मिलने वाले अतिरिक्त लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पाए। वजह यह रही कि प्राधिकरण का अध्यक्ष लंबे समय से नियुक्त ही नहीं हो पाया था। इस कारण किसानों की सैकड़ों अर्जियां अधर में लटकी रहीं।
किसान बाबूलाल की याचिका बनी मिसाल
सारंगढ़-बिलाईगढ़ के किसान बाबूलाल ने 2018 में अपनी जमीन अधिग्रहण के बाद मुआवज़े के लिए आवेदन किया था। लेकिन प्राधिकरण निष्क्रिय होने से उन्हें लाभ नहीं मिला। हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया और सरकार से जवाब मांगा।
सख्त रुख में सुप्रीम कोर्ट, चेतावनी भी दी
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सरकार से पूछा कि किसानों को वर्षों तक इंतजार क्यों करवाया गया। कोर्ट ने साफ कहा कि अब और देरी बर्दाश्त नहीं होगी। साथ ही यह भी पूछा गया कि क्यों न किसानों को अतिरिक्त विशेष मुआवज़ा दिया जाए। अदालत ने सरकार को दो माह की समयसीमा में प्राधिकरण को सक्रिय करने का आदेश दिया।
नए अध्यक्ष की नियुक्ति, जल्द शुरू होगी सुनवाई
राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि अगस्त 2025 में सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश हीरेन्द्र सिंह टेकाम को प्राधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया है। अब उनके नेतृत्व में किसानों के दावों की सुनवाई शुरू होगी। इससे हजारों प्रभावित किसानों को राहत मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
अब कैसे मिलेगा मुआवज़ा?
जिन किसानों की जमीन 2013 के बाद अधिग्रहित हुई है, वे अब प्राधिकरण के समक्ष अपने दावे पेश कर सकेंगे। इसमें बकाया मुआवज़ा, ब्याज, पुनर्वास पैकेज और विशेष क्षतिपूर्ति शामिल होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को इसके लिए एक आधिकारिक पोर्टल या हेल्पलाइन भी जारी करनी चाहिए, ताकि किसान प्रक्रिया को आसानी से समझकर समय पर आवेदन कर सकें।
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