
CG Assembly Monsoon Session: छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन विधायक अजय चंद्राकर ने दिव्यांगजनों के लिए संचालित रायपुर के शासकीय महाविद्यालय की हालत को लेकर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े जी को घेरा। चंद्राकर जी ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह को संबोधित करते हुए कहा कि आपके मुख्यमंत्री कार्यकाल में दिव्यांगजनों के लिए बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं शुरू की गई थीं, लेकिन आज भी वहां दिव्यांगजन अव्यवस्था और लापरवाही के माहौल में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। रायपुर शासकीय दिव्यांग कॉलेज
Monsoon Session 2025: चंद्राकर जी ने मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े से पूछा — कॉलेज चल तो रहा है, पर कैसे? स्वीकृत 31 पद में से 1 प्राचार्य को छोड़कर 30 पद खाली, और इसमें 23 पद प्लेसमेंट कंपनी के भरोसे है,जिनके द्वारा तबला-चित्रकला के शिक्षक बुलाए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में कौन सी प्लेसमेंट कंपनी है जो तबला वादक या चित्राकल के लिए मेन पावर देती हो, ऐसी प्लेसमेंट कंपनी से मुझे भी मिलना है। ये सभी अव्यवस्था सीधे दिव्यांगजनों के साथ मज़ाक हो रहा है। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े
31 में से 30 पद खाली, कॉलेज प्लेसमेंट एजेंसी के भरोसे
Disabled College Raipur: श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े जी से सवाल करते हुए विधायक चंद्राकर ने विधानसभा में दो टूक कहा — “अगर विभाग कॉलेज नहीं चला सकता, तो बंद कर दीजिए या किसी एनजीओ को दे दीजिए।”
उन्होंने आरोप लगाया कि कॉलेज में 31 स्वीकृत पदों में से सिर्फ 1 पद पर नियमित भर्ती हुई है, बाकी 30 पद अब भी रिक्त हैं। 23 पदों को प्लेसमेंट एजेंसी के ज़रिए भरा गया है।
Raipur Government Disabled College: इससे पहले भी मैंने पूछा था की क्या इसमें प्लेसमेंट एजेंसी, के निगरानी के लिए कोई व्यवस्था है क्या तब श्रम मंत्री जी ने कहा था इसकी कोई व्यवस्था नहीं है।
सवाल उठाया गया कि कौन-सी ऐसी प्लेसमेंट एजेंसी है जो तबला वादक और चित्रकला के शिक्षक उपलब्ध कराती है? विधायक बोले, “मैं तो ऐसी कोई कंपनी नहीं जानता।”
मंत्री बोलीं – मुझे भी आश्चर्य हुआ, अब होगी कार्रवाई
Minister Lakshmi Rajwade: महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने जवाब में कहा कि उन्हें भी आश्चर्य हुआ कि इतने सालों बाद भी पद रिक्त पड़े हैं।
श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े जी ने पिछली सरकार पर भी ठीकरा फोड़ा और बताया कि वर्ष 2017 में पद स्वीकृत हुए, लेकिन 2018 में सरकार बदल गई और फिर 5 साल तक कोई भर्ती नहीं हुई।
इस पर अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने बीच में टोका और कहा —
“आप डेढ़ साल से मंत्री हैं, पीछे की बात छोड़िए, अब आप क्या कर रही हैं ये बताइए।”
मंत्री ने जानकारी दी कि अब 112 पदों की स्वीकृति ली गई है और जल्द ही नियमित भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
कॉलेज में क्या पढ़ाया जा रहा है और कितने छात्र हैं?
मंत्री ने बताया कि रायपुर स्थित शासकीय दिव्यांग महाविद्यालय में फिलहाल दो विषयों में पढ़ाई होती है:
- बी.पी.ए. (बैचलर ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स) – जिसमें हिंदुस्तानी गायन और तबला शामिल हैं
- बी.एफ.ए. (बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स) – चित्रकला विषय
कॉलेज में वर्तमान में कुल 130 दिव्यांग छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं।
विद्यार्थियों को मिल रही सुविधाएं क्या हैं?
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े जी ने जानकारी दी कि छात्रों को आवासीय सुविधा, भोजन, शैक्षणिक सामग्री, और यात्रा भत्ता जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं।
सभी सुविधाओं की विस्तृत सूची संलग्न प्रपत्रों में दी गई है (प्रपत्र ‘स’ अनुसार)।
अनुदान क्यों घट रहा है?
Kurud MLA Ajay Chandrakar: चंद्राकर ने कॉलेज के लिए मिलने वाले वार्षिक अनुदान में कमी का भी मुद्दा उठाया।
उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में केवल 52 लाख रुपये का बजट स्वीकृत हुआ, और यह राशि भी फर्नीचर, भोजन, पेट्रोल-डीजल जैसी चीज़ों में खर्च हो रही है।
उन्होंने नाराज़गी जताते हुए कहा, “यह दिव्यांगजनों के साथ मज़ाक है। और प्लेसमेंट एजेंसी की भी जाँच कराइये जो तबला वादक और चित्रकला के शिक्षक उपलब्ध करते है।
इसके साथ विधायक ने कहा की आपका स्वीकृत पद सुरु से खाली है फिर क्योंआपके अनुदान में कमी आ रहे है, जिस स्थिति में कॉलेज खुला है तब से वैसे ही चल रहा है यह बात आप खुद स्वीकार किये हो फिर क्यों घाट रहा है।
CG Vidhansabha: उन्होंने कहा माननीया मंत्री जी आप कब तक इस मामले को देखकर ठीक करेंगी इसकी अवधि बता दीजिये और नही तो इसके विज्ञापन निकलकर प्राइवेट को दे दीजिये, या तो आप कॉलेज की व्यवस्था में सुधार कीजिये या प्राइवेट को दीजिये दिव्यांगों के साथ खिलवाड़ मत कीजिये।
2022 से 2026 तक कितना बजट मिला और कहां खर्च हुआ?
Minister Lakshmi Rajwade: मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े जी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक महाविद्यालय के संचालन के लिए जो बजट स्वीकृत हुआ, उसका उपयोग भवन, फर्नीचर, दैनिक उपयोग, पेट्रोल-डीजल, खानपान आदि मदों में किया गया है।
वेतन मद में खर्च कम हुआ क्योंकि नियमित शिक्षक नहीं हैं।
मंत्री जी ने कहा मुझे माननीय विधायक जी के द्वारा ही इस समस्या की जानकारी हुआ है, मैं अपने आप को दुर्भाग्य समझती हूँ की मेरे विभाग में ऐसी समस्या है, मुझे विभाग के अधिकारियों द्वारा कोई सटीक जानकारी नहीं मिली जल्द ही हम इस विषय को संज्ञान में लेते हुई कॉलेज की पढाई सुचारु रूप से चलाने पदों पर भर्ती करेंगे एवं कॉलेज की व्यवस्था ठीक की जाएगी।
विधायक चंद्राकर बोले – दिव्यांगों के साथ मज़ाक मत कीजिए
अजय चंद्राकर ने अंत में कहा,
“अगर विभाग कॉलेज नहीं चला सकता, तो किसी योग्य एनजीओ को दे दीजिए।
दिव्यांगजनों की पढ़ाई के साथ मज़ाक बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
सवाल गंभीर हैं, जवाब ठोस चाहिए
Disabled College Raipur Vacancy Issue: छत्तीसगढ़ में दिव्यांगजनों की शिक्षा के नाम पर चल रहे इस कॉलेज में व्यवस्थाओं की जो तस्वीर सामने आई है, वो चिंताजनक है। सरकार को अब पीछे देखने के बजाय भविष्य के लिए ठोस योजना बनानी होगी।
क्योंकि सवाल सिर्फ बजट या पदों का नहीं है – यह दिव्यांगजनों के भविष्य का सवाल है।
देखिये विधानसभा कार्यवाही का वीडियो-
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