
छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान माहौल उस वक्त गर्मा गया जब सत्ता पक्ष के ही विधायकों ने अपनी सरकार के मंत्री को कटघरे में खड़ा कर दिया। प्रदेश में बेलगाम होती सड़क दुर्घटनाओं और उनसे निपटने की सरकारी रणनीति को लेकर सदन में जबरदस्त गहमागहमी देखने को मिली। बीजेपी विधायक सुनील सोनी ने सड़क हादसों की बढ़ती संख्या, पीड़ितों को मिलने वाले मुआवजे और दुर्घटना रोकने के उपायों पर सवाल दागकर परिवहन विभाग की तैयारियों की पोल खोल दी।
एक साल में करीब 7 हजार मौतें: मंत्री ने पेश किए आंकड़े
परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने सदन में स्वीकार किया कि प्रदेश की सड़कों पर मौत का तांडव जारी है। उन्होंने बताया कि बीते एक वर्ष में सड़क हादसों में कुल 6,898 लोगों की जान गई है। मंत्री ने राहत के तौर पर जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने रायपुर को ‘जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट’ (शून्य मृत्यु जिला) योजना में शामिल किया है। साथ ही, 13 फरवरी 2026 से प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायलों के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठा रही है। हालांकि, मौतों के इस डरावने आंकड़े ने सरकार के सुरक्षा दावों पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
रायपुर की सिटी बसों पर चुप्पी: जवाब नहीं दे पाए मंत्री
सड़क सुरक्षा के बाद राजधानी रायपुर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर भी मंत्री घिरते नजर आए। विधायक सुनील सोनी ने सीधा सवाल किया कि वर्तमान में रायपुर की सड़कों पर कितनी सिटी बसें चल रही हैं और भविष्य में कितनी नई बसें चलाने की योजना है। इस तकनीकी और बुनियादी सवाल पर मंत्री के पास कोई ठोस आंकड़ा नहीं था। मंत्री के स्पष्ट जवाब न दे पाने पर विधायक ने नाराजगी जताई कि राजधानी जैसे शहर में सस्ती परिवहन सेवा का अभाव मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बड़ी समस्या बन गया है।
अजय चंद्राकर का तीखा हमला: रणनीति को बताया कागजी
बहस के बीच भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने अपनी ही सरकार के मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि सड़क दुर्घटना रोकने के लिए सरकार जो रणनीति बना रही है, वह केवल कागजों तक सीमित है। चंद्राकर ने तंज कसते हुए कहा कि यह योजना किसी विशेषज्ञ ने नहीं बनाई है, बल्कि यह प्रदेश को “मौत के मुंह में खड़ा करने वाली” रणनीति है। उनके इस बयान ने सदन में हलचल पैदा कर दी और विपक्षी सदस्यों को भी बोलने का मौका दे दिया।
ड्राइवर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के निरीक्षण की चुनौती
अजय चंद्राकर ने रायपुर स्थित ड्राइवर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (DTI) की बदहाली का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने मंत्री केदार कश्यप को खुली चुनौती दी कि वे खुद उनके साथ चलकर वहां की सुविधाओं और हकीकत का जायजा लें। चंद्राकर का कहना था कि जब तक प्रशिक्षण की व्यवस्था दुरुस्त नहीं होगी, हादसों पर लगाम लगाना मुमकिन नहीं है। इस पर मंत्री ने बचाव करते हुए कहा कि वे पहले भी वहां का मुआयना कर चुके हैं, लेकिन विधायक के आग्रह पर वे दोबारा साथ चलने को तैयार हैं।
सार्वजनिक परिवहन और सुरक्षा पर उठते सवाल
विधानसभा की इस कार्यवाही ने यह साफ कर दिया है कि परिवहन विभाग और जनता की उम्मीदों के बीच बड़ी खाई है। एक तरफ जहां भारी-भरकम बजट पेश किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ बुनियादी सेवाएं जैसे सिटी बसें और सुरक्षित सड़कें अब भी एक सपना बनी हुई हैं। सत्ता पक्ष के विधायकों द्वारा ही मंत्री को घेरे जाने से यह संदेश गया है कि सड़क सुरक्षा जैसे गंभीर विषयों पर अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। अब देखना होगा कि विभाग इन तीखे सवालों के बाद जमीनी स्तर पर क्या बदलाव करता है।



