मगरलोड के परसवानी में बिच्छू का कहर: 7 साल की बच्ची की दर्दनाक मौत, कुछ दिनों में दूसरी घटना

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। मगरलोड ब्लॉक के परसवानी गांव में 7 साल की बच्ची खिलेश निषाद स्कूल से लौटकर दोस्तों के साथ बेफिक्री से जामुन तोड़ने जाती है। मासूम हंसी, चहकती बातें, खेल के बीच अचानक एक बिच्छू आता है और पलभर में सब कुछ बदल जाता है।

जामुन तोड़ने गई थी बच्ची, बिच्छू ने डंसा और मौत ने घेर लिया

बच्ची 6 जून को अपने दोस्तों के साथ गांव में जामुन तोड़ने गई थी, उसी दौरान झाड़ियों में छिपे बिच्छू ने उसे डंक मार दिया। उसके बाद जो हुआ, वो हर मां-बाप के लिए डरावना सपना बन सकता है।

इलाज की भागदौड़, लेकिन नहीं बच सकी जान

डंक लगने के तुरंत बाद परिजन बच्ची को मगरलोड के सरकारी अस्पताल ले गए। वहां से हालत बिगड़ती देख उसे धमतरी जिला अस्पताल रेफर किया गया। लेकिन तब तक जहर पूरे शरीर में फैल चुका था।
डॉक्टरों ने अंतिम उम्मीद के तौर पर उसे मसीही अस्पताल भेजा, लेकिन अफसोस… 6 जून की रात इलाज के दौरान बच्ची की मौत हो गई।

7 जून को पोस्टमार्टम के बाद बच्ची का शव परिजनों को सौंप दिया गया।

बिच्छू के डंक से कुछ दिनों में दूसरी मौत

ये कोई इकलौती घटना नहीं है। कुछ दिन पहले धमतरी के ही बानगर गांव में एक महिला खेत में काम कर रही थी, तभी उसे बिच्छू ने डस लिया। इलाज के लिए जिला अस्पताल लाया गया लेकिन उसकी भी मौत हो गई थी।

यानि कुछ ही दिनों में बिच्छू के डंक से ये दूसरी मौत है, जो स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और ग्रामीण इलाकों में खतरे की घंटी है।

सवाल उठते हैं…

  • क्या ग्रामीण इलाकों में ऐसे मामलों के लिए कोई त्वरित प्राथमिक चिकित्सा सुविधा है?
  • बच्चों को कैसे जागरूक किया जा रहा है जंगल या खेतों में जाने के दौरान सतर्क रहने के लिए?
  • क्या प्रशासन इस बढ़ती समस्या को लेकर सतर्क है?

धमतरी में मासूम बच्ची की जान चली गई, और बिच्छू का डंक एक बार फिर ज़िंदगी पर भारी पड़ गया। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि ऐसे मामलों को गंभीरता से लें, गांवों में जनजागरूकता, प्राथमिक चिकित्सा किट और तत्काल उपचार व्यवस्था पर ध्यान दें। क्योंकि ये सिर्फ एक बच्ची की मौत नहीं, पूरे सिस्टम की परीक्षा है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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