
धमतरी: छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी ‘महतारी वंदन योजना‘ में सेंधमारी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। धमतरी जिले में एक महिला ने सरकारी रिकॉर्ड में अपने जीवित पति को मृत घोषित कर दिया और खुद को विधवा बताकर योजना की राशि हासिल करने लगी। इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब महिला के असली पति ने खुद कलेक्टर दफ्तर पहुंचकर अपनी पत्नी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता राजेंद्र सिन्हा, जो कांकेर के कोरर स्वास्थ्य केंद्र में सरकारी कर्मचारी हैं, उन्होंने कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन देकर अपनी पत्नी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। राजेंद्र के मुताबिक, उनकी पत्नी पिछले 12-13 वर्षों से मायके में रह रही है और वहीं से उसने इस जालसाजी को अंजाम दिया।
शपथ पत्र में बोला सफेद झूठ: सरकारी नौकरी और पति की जानकारी छिपाई, नियमों को ताक पर रखकर किया आवेदन
योजना का लाभ लेने के लिए महिला ने आवेदन पत्र और शपथ पत्र में कई गलत जानकारियां भरीं। महतारी वंदन योजना के नियमों के मुताबिक, यदि परिवार का कोई सदस्य सरकारी नौकरी में है, तो वह लाभ का पात्र नहीं होता। राजेंद्र सिन्हा ने बताया कि उनकी पत्नी ने आवेदन में इस कॉलम पर गलत निशान लगाया और खुद को पात्र बताया। सबसे बड़ी धोखाधड़ी दस्तावेजों के साथ की गई, जहां महिला ने ‘पति का मृत्यु प्रमाण पत्र संलग्न है’ वाले विकल्प पर सही का निशान लगाकर खुद को विधवा दर्शाया। इसी आधार पर उसे शासन की ओर से हर महीने राशि का भुगतान होने लगा।
न्यायालय में पति ‘जिंदा’ और शासन के लिए ‘मृत’: कोर्ट में भरण-पोषण के लिए किया केस, सरकारी रिकॉर्ड में बनी विधवा
इस मामले का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि महिला एक तरफ कुटुंब न्यायालय में अपने पति को जीवित बताकर उनसे भरण-पोषण (Maintenance) की मांग कर रही है। कोर्ट में उसने पति के सरकारी कर्मचारी होने की बात कबूल की है ताकि उसे ज्यादा पैसे मिल सकें। वहीं दूसरी ओर, प्रशासन की नजर में उसने उसी पति को मृत दिखाकर विधवा पेंशन जैसी सुविधाओं का लाभ उठाना शुरू कर दिया। राजेंद्र सिन्हा ने कलेक्टर को सौंपे पत्र में कहा है कि उनकी पत्नी एक साथ न्यायालय और शासन दोनों को गुमराह कर रही है। यह कपटपूर्ण आचरण न केवल अनैतिक है बल्कि कानूनी रूप से बड़ा अपराध भी है।
प्रशासनिक जांच के घेरे में मामला: गलत तरीके से ली गई राशि की होगी रिकवरी, महिला पर दर्ज हो सकता है क्रिमिनल केस
शिकायत मिलने के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच की तैयारी शुरू हो गई है। कलेक्टर कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक, महिला द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों और शपथ पत्र का मिलान किया जाएगा। यदि जांच में पति के दावे सही पाए जाते हैं, तो महिला के खिलाफ धोखाधड़ी और सरकारी रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ करने की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी। इसके अलावा, अब तक योजना के तहत महिला ने जितनी भी राशि प्राप्त की है, उसकी वसूली भी प्रशासन द्वारा ब्याज समेत की जा सकती है। यह मामला उन लोगों के लिए भी चेतावनी है जो अपात्र होने के बावजूद सरकारी योजनाओं का गलत लाभ ले रहे हैं।
अपात्रों की छंटनी के लिए चलेगा अभियान: योजना के सत्यापन पर उठे सवाल, क्या जमीनी जांच में हुई चूक?
महतारी वंदन योजना के इस फर्जीवाड़े ने प्रशासन की सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह उठता है कि क्या ग्राम पंचायत या स्थानीय निकाय स्तर पर दस्तावेजों की ठीक से जांच नहीं की गई? इस घटना के बाद अब धमतरी जिले सहित पूरे प्रदेश में अपात्र लाभार्थियों की दोबारा जांच की मांग उठने लगी है। प्रशासन का कहना है कि वे समय-समय पर रैंडम जांच करते हैं और ऐसे फर्जी मामले सामने आने पर कड़ी कार्रवाई की जाती है। फिलहाल, राजेंद्र सिन्हा की शिकायत के बाद अब पुलिस और महिला बाल विकास विभाग इस मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रहे हैं।



