स्कूली बच्चों के साथ बड़ा हादसा: जहरीला फल खाने से 19 छात्र बीमार, प्रार्थना के दौरान बेहोश होकर गिरने लगे मासूम

खैरागढ़: छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले के करमतरा गांव स्थित सरकारी प्राइमरी स्कूल में मंगलवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया जब स्कूल परिसर में बच्चे एक-एक कर बेहोश होने लगे। प्रार्थना सभा की तैयारी चल रही थी कि अचानक 19 बच्चों को चक्कर आने लगे और वे जमीन पर गिर पड़े। शिक्षकों ने जब बच्चों से पूछताछ की तो पता चला कि स्कूल खुलने से पहले इन बच्चों ने परिसर और आसपास लगे रतनजोत के पौधे के फल खा लिए थे। रतनजोत का फल जहरीला होता है और इसे खाते ही बच्चों को उल्टियां और घबराहट होने लगी। स्कूल प्रबंधन ने बिना देरी किए सभी बीमार बच्चों को जालबांधा के स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।

तीन बच्चों की हालत नाजुक: बेहतर इलाज के लिए खैरागढ़ रेफर, डॉक्टरों की टीम कर रही निगरानी

अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने बच्चों का इलाज शुरू कर दिया। चिकित्सा अधिकारियों के मुताबिक इलाज के बाद 16 बच्चों की स्थिति अब खतरे से बाहर है लेकिन तीन बच्चों की तबीयत ज्यादा बिगड़ने के कारण उन्हें खैरागढ़ सिविल अस्पताल भेजा गया है। इन बच्चों को लगातार डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। घटना की खबर फैलते ही गांव में सन्नाटा पसर गया और बड़ी संख्या में डरे हुए माता-पिता अस्पताल पहुंच गए। डॉक्टरों का कहना है कि रतनजोत के बीज शरीर में जहर की तरह काम करते हैं जिससे पेट में तेज दर्द और कमजोरी महसूस होती है। समय पर इलाज मिल जाने से एक बड़ा अनहोनी टल गई है।

सुरक्षा व्यवस्था पर खड़े हुए गंभीर सवाल: स्कूल परिसर में कैसे मौजूद था जहरीला पौधा?

इस हादसे ने शिक्षा विभाग और स्कूल प्रशासन की बड़ी लापरवाही को उजागर कर दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस परिसर में छोटे बच्चे खेलते हैं वहां रतनजोत जैसे जहरीले पौधे को क्यों नहीं हटाया गया। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल की साफ-सफाई और सुरक्षा को लेकर अक्सर अनदेखी की जाती है। चौंकाने वाली बात यह भी रही कि इतनी बड़ी घटना होने के काफी देर बाद तक जिले के शिक्षा अधिकारी इस मामले से बेखबर थे। इससे विभाग की कार्यप्रणाली और बच्चों की सुरक्षा के प्रति उनकी गंभीरता पर उंगली उठ रही है।

गांव वालों ने की कड़ी कार्रवाई की मांग: जहरीले पौधों को हटाने और दोषियों पर शिकंजा कसने की जिद

करमतरा गांव के लोगों और पीड़ित बच्चों के अभिभावकों ने प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग की है। उनकी मांग है कि न केवल इस स्कूल बल्कि जिले के सभी सरकारी स्कूलों का सर्वे किया जाए और जहां भी ऐसे खतरनाक पेड़-पौधे हैं उन्हें तुरंत काटा जाए। अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि यदि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार स्कूल स्टाफ और अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करेंगे। प्रशासन ने फिलहाल जांच का भरोसा दिया है लेकिन इस घटना ने पूरे प्रदेश के स्कूलों के लिए एक चेतावनी जारी कर दी है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए परिसर की निगरानी कितनी जरूरी है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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