
बिलासपुर:छत्तीसगढ़ में हुए एक भीषण रेल हादसे के समय, राज्य के राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री टंकाराम वर्मा एक बड़ी चूक को लेकर विवादों में घिर गए हैं। बिलासपुर जिले में मंगलवार शाम (4 नवंबर को) हुए बड़े ट्रेन हादसे के बाद जब दर्जनों यात्री ट्रेन की बोगियों में मदद के लिए चीख-पुकार रहे थे, ठीक उसी वक्त आपदा मंत्री जांजगीर-चांपा जिले में आयोजित राज्योत्सव के समापन समारोह में मंच से गीत गाने में मशगूल थे।
उनका गीत गाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने पूरे प्रदेश में एक बड़ी बहस छेड़ दी है: क्या आपदा के समय जिम्मेदारी संभालनी चाहिए थी, या मंच पर ‘राग मल्हार’ छेड़ना सही था?
मंच पर मंत्रीजी की ‘तान’, ट्रैक पर यात्रियों की ‘चीख’
वायरल वीडियो में मंत्री टंकाराम वर्मा जांजगीर-चांपा जिले में आयोजित तीन दिवसीय रजत महोत्सव के समापन समारोह में मंच पर माइक थामे गीत गुनगुनाते नजर आ रहे हैं। यह वीडियो उसी समय का है, जब बिलासपुर में मेमू ट्रेन गतोरा स्टेशन के आसपास एक मालगाड़ी से भीषण रूप से टकरा गई थी।
चश्मदीदों के अनुसार, दुर्घटना का मंजर बेहद भयानक था; ट्रेन की बोगियाँ आसमान में उछल गईं थीं और पैसेंजरों की चीख-पुकार से पूरा इलाका दहल उठा था। ठीक उसी समय मंत्री जी का एक प्रमुख विभाग आपदा प्रबंधन है, लेकिन वायरल वीडियो बताता है कि वह दुर्घटनास्थल से दूर उत्सव में व्यस्त थे।
देखिये वीडियो-
हादसे में 11 की मौत, दो की हालत अति गंभीर
4 नवंबर को शाम 4 बजे हुए इस भीषण हादसे की भयावहता देर रात तक चली। बिलासपुर कलेक्टर ने पुष्टि की है कि 4-5 नवंबर की दरमियानी रात 2:30 बजे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन में लोको पायलट समेत 11 लोगों की मौत हुई है। इस हादसे में 20 यात्री घायल हुए, जिनमें से दो की हालत गंभीर और एक की हालत अति गंभीर बताई जा रही है। ऐसे गंभीर और दुखद समय में, जब पूरा देश शोक में डूबा था, आपदा मंत्री का मंच पर गाना गाना प्रदेश की जनता के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
आपदा मंत्री की प्राथमिकता: उत्सव या मोर्चा संभालना?
मंत्री टंकाराम वर्मा की यह हरकत राजनीतिक और नैतिक दोनों स्तरों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। आपदा प्रबंधन विभाग के मुखिया का काम आपदा के समय सबसे पहले मोर्चा संभालना, राहत और बचाव कार्यों की निगरानी करना होता है।
सोशल मीडिया पर लोग तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं, जहाँ मंत्री की तुलना रोमन सम्राट ‘नीरो’ से की जा रही है—जिसने कथित तौर पर रोम के जलते समय बांसुरी बजाई थी। यह वीडियो एक ओर जहां मंत्री की जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगाता है, वहीं यह भी दर्शाता है कि क्या सरकार और उसके मंत्रियों के लिए संकट के समय उत्सव और प्रोटोकॉल ज्यादा महत्वपूर्ण हैं, या फिर पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई।



