
सूरजपुर: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के पतरापारा इलाके में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए आठ संदिग्ध युवकों को अपनी हिरासत में लिया है। ये सभी युवक पिछले कुछ समय से स्थानीय एक ब्रेड फैक्ट्री में काम कर रहे थे। मोहल्ले के निवासियों को उनकी अजीब बोलचाल और संदिग्ध गतिविधियों के कारण उन पर शक हुआ। स्थानीय लोगों ने अपनी शंका बजरंग दल के पदाधिकारियों से साझा की, जिसके बाद पुलिस को मामले की जानकारी दी गई। सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस की टीम ने फैक्ट्री में दबिश दी और काम कर रहे सभी आठ लोगों को पकड़कर थाने ले आई। पकड़े गए व्यक्तियों में चार नाबालिग भी बताए जा रहे हैं, जिनसे पुलिस गहन पूछताछ कर रही है।
दस्तावेजों की जांच में जुटी पुलिस: पश्चिम बंगाल के पते और पहचान पत्र निकले संदिग्ध
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस इन सभी के पहचान पत्रों की बारीकी से जांच कर रही है। सूरजपुर के एडिशनल एसपी संतोष कुमार महतो के अनुसार, शुरुआती जांच में कुछ युवकों के पास से पश्चिम बंगाल के पते वाले आधार कार्ड मिले हैं, जबकि कुछ के पास अपनी पहचान साबित करने के लिए कोई पुख्ता दस्तावेज मौजूद नहीं हैं। पुलिस अब पश्चिम बंगाल के संबंधित थानों से संपर्क कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि ये युवक वास्तव में वहीं के रहने वाले हैं या अवैध तरीके से सीमा पार कर यहां आए हैं। पुलिस उनके मूल निवास और छत्तीसगढ़ आने के असली मकसद की भी पड़ताल कर रही है।
फैक्ट्री संचालक भी घेरे में: बिना वेरिफिकेशन बाहरी लोगों को काम पर रखने पर उठे सवाल
इस घटना के सामने आने के बाद ब्रेड फैक्ट्री के मालिक की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर बिना किसी पुलिस वेरिफिकेशन या वैध पहचान पत्र के इन बाहरी लोगों को काम पर कैसे रखा गया। नियमों के मुताबिक, किसी भी बाहरी व्यक्ति को काम पर रखने या किराए पर मकान देने से पहले पुलिस को सूचना देना अनिवार्य है। संचालक की इस लापरवाही ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। पुलिस फैक्ट्री मालिक से भी इस बारे में पूछताछ कर रही है कि इन युवकों का संपर्क उससे कैसे हुआ।
प्रशासनिक सतर्कता पर सवाल: संगठन का आरोप- ‘पुलिस के बजाय जनता क्यों दे रही है सूचना’
इस पूरे घटनाक्रम के बाद बजरंग दल के पदाधिकारियों ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर की है। संगठन के सदस्य दिनेश साहू का कहना है कि बाहरी लोग महीनों से जिले में रह रहे हैं और काम कर रहे हैं, लेकिन खुफिया तंत्र और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। उन्होंने आरोप लगाया कि जब स्थानीय लोग और संगठन सूचना देते हैं, तब जाकर प्रशासन जागता है। इस मामले के बाद अब जिले भर की अन्य फैक्ट्रियों और बस्तियों में भी बाहरी लोगों के वेरिफिकेशन की मांग उठने लगी है ताकि सुरक्षा से कोई समझौता न हो।



