
बालोद: छत्तीसगढ़ के डौंडी विकासखंड में सरकारी सिस्टम की एक ऐसी लापरवाही सामने आई है जिसे सुनकर हर कोई दंग है। खाद्य विभाग ने इलाके के करीब 1400 जिंदा व्यक्तियों को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर उनके राशन कार्ड निरस्त कर दिए हैं। इस गड़बड़ी का खुलासा तब हुआ जब बड़ी संख्या में ग्रामीण राशन दुकानों से खाली हाथ लौटने लगे। मामला गरमाने पर जिला पंचायत सदस्य नीलिमा श्याम ने सिंघनवाही और साल्हे जैसे गांवों का दौरा किया, जहां उन्होंने पाया कि जो लोग उनके सामने खड़े होकर अपनी व्यथा सुना रहे हैं, विभाग ने उन्हें फाइलों में मृत बता दिया है। इस लापरवाही की वजह से गरीब परिवारों के सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
मुखिया की मौत का बहाना और पूरे परिवार का राशन बंद: सरपंच ने भी उठाए विभाग पर सवाल
ग्राम पंचायत सिंघनवाही की सरपंच सविता गोटी ने बताया कि उनके गांव के ही आधा दर्जन परिवारों को पिछले दो महीनों से राशन नहीं मिला है। इनमें दमयंतीन बाई, जैन बाई और कुंती निषाद जैसे कार्डधारी शामिल हैं। विभाग का तर्क है कि कार्ड के मुख्य सदस्य यानी मुखिया की मौत हो चुकी है, इसलिए कार्ड बंद कर दिया गया। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अगर परिवार के किसी एक सदस्य की मृत्यु हुई भी है, तो बाकी जीवित सदस्यों का हक क्यों मारा जा रहा है? ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग ने बिना किसी भौतिक सत्यापन या घर-घर जाकर जांच किए ही दफ्तर में बैठकर नाम काटने की सूची तैयार कर दी।
दोषियों पर कार्रवाई और दोबारा राशन शुरू करने की मांग: जिला खाद्य अधिकारी तक पहुंचा मामला
जिला पंचायत सदस्य नीलिमा श्याम ने इस पूरे प्रकरण को लेकर जिला खाद्य विभाग के अधिकारियों से कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने मांग की है कि पूरे डौंडी ब्लॉक में काटे गए नामों की दोबारा निष्पक्ष जांच की जाए और जो लोग जीवित हैं, उनके राशन कार्ड तत्काल बहाल किए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी है कि विभागीय सुस्ती के कारण गरीबों का निवाला छीनना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल विभाग ने मामले की जांच का भरोसा दिया है, लेकिन ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में लोगों को बिना जांचे मृत कैसे मान लिया गया। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इन 1400 लोगों को उनका हक कब तक वापस मिलता है।



