
रायपुर: छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रमुख अमित बघेल ने 5 दिसंबर देवेंद्र नगर पुलिस थाना पहुंचकर सरेंडर किया था जिसके बाद उन्हें पुलिस कि कस्टेडी में उनके माता के निधन के बाद अंत्येष्टि कार्यक्रम में शामिल हुए और पुनः उन्हें थाने लाया गया। जिसके बाद कोर्ट ने 19 दिसंबर तक न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। बघेल के खिलाफ दर्ज अलग-अलग मामलों में भिलाई, छिंदवाड़ा और बेंगलुरु में दर्ज हुई एफआईआर (FIR) की कॉपियां कोर्ट में पहुंच चुकी थीं। कोर्ट की अनुमति मिलते ही पुलिस ने इन तीनों मामलों में भी औपचारिक रूप से बघेल की गिरफ्तारी की है। बघेल पर भड़काऊ बयान देने और समाज में तनाव फैलाने के गंभीर आरोप लगे हैं।

मां के मृत्यु कार्यक्रम के लिए अंतरिम जमानत से कोर्ट का इनकार
अमित बघेल की ओर से बचाव पक्ष ने कोर्ट में अंतरिम जमानत की अर्जी लगाई थी। बघेल अपनी माता के निधन के बाद होने वाले मृत्यु कार्यक्रम (8 से 15 दिसंबर) में शामिल होना चाहते थे। लेकिन कोर्ट ने अंतरिम जमानत देने से साफ इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा है कि अभी की स्थिति में जमानत नहीं दी जा सकती। बचाव पक्ष के वकील एन. के. ठाकुर ने बताया कि 11 दिसंबर को दोबारा जमानत याचिका दायर की जाएगी।

विपक्षी पक्ष ने जमानत खारिज करने के लिए 6 बिंदु रखे
अग्रवाल समाज की ओर से आपत्तिकर्ता अशोक कुमार अग्रवाल ने 6 बिन्दुओं पर बघेल की जमानत याचिका खारिज करने की अपील की थी। उन्होंने कोर्ट में कहा कि आरोपी एक राजनीतिक और रसूखदार व्यक्ति है और उसके खिलाफ दर्ज अपराधों की गंभीरता को देखते हुए जमानत नहीं दी जानी चाहिए। आपत्तिकर्ता ने आरोप लगाया कि बघेल ने जानबूझकर एक घटना को सांप्रदायिक रंग दिया और समाज में तनाव बढ़ाने का काम किया।

भड़काऊ बयान: ‘अग्रसेन कौन है? लबरा या चोर’
आपत्तिकर्ता का कहना था कि आरोपी ने सार्वजनिक रूप से भड़काऊ बयान दिए। उसने सवाल उठाया था कि ‘अग्रसेन कौन है? लबरा या चोर’ और यह भी कहा था कि अगर छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति टूट सकती है तो अन्य नेताओं की क्यों नहीं? आरोपी ने लोगों को हिंसा करने और ‘तलवार–बंदूक उठाने’ जैसी बातें कहकर भीड़ को भड़काने का प्रयास किया।
वीडियो वायरल कर सांप्रदायिक दुश्मनी भड़काने का आरोप
कोर्ट में बताया गया कि अमित बघेल ने अपने भड़काऊ वीडियो सोशल मीडिया पर फैलाए। इन वीडियो से एक समुदाय के लोगों की जान को खतरा पैदा हुआ और समाज में दुश्मनी, नफरत और हिंसा भड़काने का सीधा प्रयास किया गया। आपत्तिकर्ता ने चेतावनी दी कि यदि आरोपी को जमानत मिली, तो वह फिर से समाज में तनाव फैलाने की कोशिश कर सकता है।

आपराधिक इतिहास और सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं
आपत्तिकर्ता ने कोर्ट को यह भी बताया कि आरोपी का आपराधिक इतिहास है। उसके खिलाफ छिंदवाड़ा और उल्हासनगर में भी गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज है, जो यह संकेत देता है कि आरोपी आदतन अपराधी है। इसके अलावा, आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की थी (WP 488/2025), जिसे 24 नवंबर 2025 को खारिज कर दिया गया था, यानी उसे वहां से भी कोई राहत नहीं मिली थी।



