
रायपुर: छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया चल रही है। इस प्रारंभिक प्रक्रिया से जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चिंताजनक हैं। प्रदेश में करीब 22 लाख मतदाताओं को डी कैटेगरी में डाला गया है, यानी इन वोटर्स की कोई पुख्ता जानकारी सामने नहीं आई है। इस बड़ी संख्या को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं और मतदाता सूची की शुद्धता पर बहस शुरू हो गई है। हालांकि, चुनाव आयोग के अनुसार, छत्तीसगढ़ में करीब 97 फीसदी एसआईआर का काम हो गया है।
डी कैटेगरी का मतलब: मृत, शिफ्ट हुए या दस्तावेज़ नहीं
चुनाव आयोग ने ‘डी कैटेगरी’ में उन मतदाताओं को रखा है, जिनकी पहचान संदिग्ध है या जिनका कोई वैध दस्तावेज़ नहीं है। इस श्रेणी में मुख्य रूप से उन वोटर्स को शामिल किया गया है जिनकी मृत्यु हो गई है, जो किसी दूसरी जगह पर शिफ्ट हो गए हैं, या जिनके पास अपनी पहचान साबित करने के लिए कोई वैध दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं है।
संदिग्ध मतदाताओं के पास 15 जनवरी तक का समय
जिन मतदाताओं को डी कैटेगरी में रखा गया है, उनके लिए चुनाव आयोग ने 15 जनवरी 2026 तक का समय दिया है। ये मतदाता इस अंतिम तिथि तक अपने वैध दस्तावेज़ बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) के पास जमा कर सकते हैं। अगर वे निर्धारित समय सीमा तक दस्तावेज़ नहीं जमा करते हैं, तो उनके लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं और उन्हें मतदाता सूची से हटाया जा सकता है।
रायपुर में सर्वाधिक संदिग्ध मतदाता, बिलासपुर दूसरे स्थान पर
एसआईआर के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, रायपुर जिले में सबसे अधिक मतदाताओं की जानकारी नहीं मिली है। रायपुर में करीब 3.5 लाख मतदाता संदिग्ध पाए गए हैं। बिलासपुर में यह संख्या 2.84 लाख है, दुर्ग में 2.1 लाख और कोरबा में एक लाख मतदाताओं के बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिली है। इसके अलावा बलौदाबाजार-भाटापारा में 97 हजार और रायगढ़ में 83 हजार संदिग्ध मतदाता सामने आए हैं।



