
CG Census 2026 Property Tax Reform Campaign: छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने और नगरीय निकायों के राजस्व में बढ़ोतरी के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने आगामी राष्ट्रीय जनगणना के प्रथम चरण “हाउस लिस्टिंग एवं हाउसिंग जनगणना” को टैक्स सुधार के एक बड़े अवसर के रूप में भुनाने का फैसला किया है। इस संबंध में राज्य के सभी नगर निगमों, नगरपालिकाओं और नगर पंचायतों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार का मानना है कि वर्तमान में निकायों की संपत्तिकर मांग पंजी (डिमांड रजिस्टर) और कर संग्रह व्यवस्था में भारी कमियां हैं, जिससे हर साल करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। इस घाटे को पाटने के लिए जनगणना के महासर्वे का इस्तेमाल किया जाएगा।
घर-घर होने वाले भौतिक सत्यापन से सामने आएगी संपत्तियों की वास्तविक स्थिति
जनगणना अभियान के दौरान प्रगणकों और सरकारी कर्मचारियों की टीमें हर एक घर और व्यावसायिक भवन का भौतिक सत्यापन करने जमीन पर उतरेंगी। इस प्रक्रिया के तहत प्रत्येक मकान के बाहर एक नया विशिष्ट सेंसस नंबर (जनगणना मकान नंबर) दर्ज किया जाएगा। नगरीय प्रशासन विभाग ने तय किया है कि इसी दौरान संपत्तियों की वास्तविक संख्या, उनके क्षेत्रफल और वर्तमान स्थिति का पूरा ब्यौरा जुटाया जाएगा। जिन भवनों को निकायों ने पहले से प्रॉपर्टी आईडी जारी की है, उनका मिलान इस नए डेटा से किया जाएगा जिससे डुप्लीकेट, फर्जी या रिकॉर्ड से छूटे हुए मकानों की गड़बड़ी तुरंत पकड़ी जा सकेगी।
आवासीय दिखाकर कमर्शियल उपयोग करने वालों की अब खैर नहीं, होगी सीधी कार्रवाई
टैक्स चोरी को रोकने के लिए विभाग ने उन भवन स्वामियों पर विशेष नजर रखने को कहा है जो कागजों में अपनी संपत्ति को आवासीय (रहने का मकान) बताते हैं, लेकिन वहां व्यावसायिक गतिविधियां संचालित कर रहे हैं। शहरों में ऐसे हजारों मकान हैं जहां अवैध रूप से दुकानें, निजी दफ्तर, क्लीनिक, कोचिंग संस्थान या गोदाम धड़ल्ले से चल रहे हैं। नए सर्वे के आधार पर इन सभी संपत्तियों की श्रेणी को तुरंत बदलकर कमर्शियल या मिक्स्ड (मिश्रित) उपयोग में दर्ज किया जाएगा। इसके बाद वास्तविक उपयोग के मानदंडों के अनुसार नया और संशोधित टैक्स निर्धारित कर वसूली की जाएगी।
नए निर्माण, अवैध कॉलोनियां और खाली प्लॉट भी अब आएंगे टैक्स के दायरे में
नगरीय निकायों को जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि शहरों और कस्बों के भीतर मौजूद हर उस जमीन या मलबे पर टैक्स वसूला जाए जो नियमानुसार कर योग्य है। जनगणना सर्वे के दौरान उन संपत्तियों की एक अलग सूची तैयार होगी जो आज तक सरकारी फाइलों में दर्ज ही नहीं हो सकी हैं। इसमें हाल ही में बने नए मकान, नियमितीकरण के दायरे में आए भवन, मालिकाना हक बदलने वाली संपत्तियां, शहरों के भीतर खाली पड़े भूखंड और बिना अनुमति के विकसित की गई अवैध कॉलोनियों के निर्माण शामिल हैं। इन सभी को कर के दायरे में लाकर निकायों की आत्मनिर्भरता बढ़ाई जाएगी।
झुग्गी बस्तियों और घनी आबादी वाले इलाकों का होगा अलग से विशेष सर्वे
शहरों के भीतर स्थित अनौपचारिक कॉलोनियों, झुग्गी बस्तियों और बेहद संकरे व घनी आबादी वाले क्षेत्रों के लिए विभाग ने विशेष रणनीति तैयार की है। इन इलाकों में बड़े पैमाने पर ऐसी संरचनाएं और बहुमंजिला छोटे मकान बन चुके हैं, जिनका कोई भी ब्यौरा नगर निगम या नगर पंचायत के पास उपलब्ध नहीं है। डोर-टू-डोर सर्वे के जरिए इन क्षेत्रों के हर एक निर्माण की मुकम्मल जानकारी जुटाई जाएगी। इस विशेष मुहिम से न केवल निकायों को अपनी वास्तविक शहरी आबादी के फैलाव का पता चलेगा, बल्कि उनके कर संग्रह के दायरे में भी एक बड़ा उछाल देखने को मिलेगा।
बकायेदारों की बनेगी वार्डवार डिजिटल सूची, वसूली के लिए चलेगा विशेष अभियान
इस महासर्वे के दौरान केवल नए मकानों की खोज नहीं होगी, बल्कि वर्तमान संपत्तियों पर बकाया टैक्स की स्थिति का भी पूरा हिसाब-किताब देखा जाएगा। सर्वे से प्राप्त होने वाले इस प्रामाणिक डेटा के आधार पर प्रत्येक वार्ड के बड़े और पुराने बकायेदारों की एक नई सूची बनाई जाएगी। विभाग ने सभी नगरीय निकायों को पाबंद किया है कि वे इस पूरे डेटा को अपने मौजूदा डिजिटल रिकॉर्ड और सॉफ्टवेयर से लिंक करें। इससे टैक्स असेसमेंट, ऑनलाइन भुगतान और डिमांड नोटिस भेजने की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो जाएगी और मानवीय हस्तक्षेप की गुंजाइश खत्म होगी।
पारदर्शी और तकनीकी रूप से सक्षम बनेगी छत्तीसगढ़ की संपत्तिकर प्रणाली
नगरीय मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रीय जनगणना के प्रशासनिक ढांचे का उपयोग टैक्स सुधारों के लिए करना एक व्यावहारिक और बेहद सटीक कदम है। इससे निकायों का अलग से होने वाला सर्वेक्षण का भारी-भरकम खर्च और समय दोनों बचेगा। टैक्स चोरी के रास्ते बंद होने से शहरों के विकास कार्यों के लिए निकायों के पास अतिरिक्त संसाधन और फंड उपलब्ध हो सकेंगे। राज्य सरकार का अंतिम लक्ष्य केवल कर का बोझ बढ़ाना नहीं है, बल्कि एक ऐसी आधुनिक, पारदर्शी और पूरी तरह तकनीकी आधारित संपत्तिकर व्यवस्था का निर्माण करना है जिसमें किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार की संभावना न रहे।



