
Pre-Wedding Shoot: छत्तीसगढ़ के साहू समाज ने समाज में बढ़ती दिखावे की संस्कृति को रोकने के लिए एक बड़ा साहसिक फैसला लिया है। प्रदेश साहू संघ की राज्य स्तरीय बैठक में यह तय किया गया है कि अब समाज के युवक-युवतियों के विवाह से पहले होने वाले प्री-वेडिंग शूट पर पूरी तरह रोक रहेगी। समाज के पदाधिकारियों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से न केवल समय की बर्बादी होती है बल्कि समाज की मर्यादा पर भी असर पड़ता है।
फिजूलखर्ची पर लगाम लगाने की कवायद
समाज ने शादियों में होने वाले अनावश्यक खर्चों को लेकर चिंता जाहिर की है। बैठक में चर्चा हुई कि प्री-वेडिंग शूट और दिखावटी तामझाम के कारण विवाह समारोह बेहद महंगे होते जा रहे हैं। इसका सबसे बुरा असर मध्यम और गरीब वर्ग के परिवारों पर पड़ता है जो लोक-लाज के डर से कर्ज लेकर ऐसे भारी-भरकम इंतजाम करते हैं। समाज को सादगी और समानता की राह पर वापस लाने के लिए इस फिजूलखर्ची को रोकना अनिवार्य माना गया है।
विवाह संस्कार की गरिमा बनाए रखने पर जोर
साहू समाज के प्रतिनिधियों के अनुसार विवाह एक पवित्र संस्कार है जिसे तमाशा नहीं बनाया जाना चाहिए। आजकल शादियों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ ने पारंपरिक रीति-रिवाजों को पीछे छोड़ दिया है। प्रदेश साहू संघ ने स्पष्ट किया कि इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य समाज में समरसता लाना है ताकि किसी भी गरीब परिवार को शादी के खर्चों के कारण हीन भावना महसूस न हो।
समाज के लोगों से सादगी की अपील
प्रदेश साहू संघ ने समाज के सभी वर्गों और युवाओं से इस नए नियम का पालन करने का आग्रह किया है। पदाधिकारियों ने कहा है कि लोग विवाह जैसे मंगल कार्यों को पारंपरिक गरिमा और सादगी के साथ संपन्न करें। संघ ने यह भी संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में इन नियमों को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश और निगरानी समितियां भी बनाई जा सकती हैं।
जन्मदिन पर केक काटने जैसी प्रथाओं पर भी रोक
उल्लेखनीय है कि साहू समाज समय-समय पर अपने नियमों में बदलाव करता रहा है। इससे पहले भी समाज के कई जिलों में जन्मदिन पर केक काटने की पश्चिमी परंपरा पर रोक लगाई जा चुकी है। समाज का मानना है कि विदेशी परंपराओं के बजाय हमें अपनी भारतीय संस्कृति और संस्कारों को बढ़ावा देना चाहिए। इसके पीछे का तर्क भी दिखावे को कम करना और जड़ों से जुड़े रहना है।
पारंपरिक रस्मों में लेन-देन पर पाबंदी
शादियों में होने वाली कुछ रस्मों को भी अब समाज ने प्रतिबंधित कर दिया है। विवाह के दौरान होने वाली ‘जूता छिपाई’ और ‘संग छुड़ाने’ जैसी रस्मों में जबरन पैसों की मांग पर अब रोक रहेगी। समाज के बुजुर्गों का कहना है कि ये रस्में केवल मनोरंजन के लिए होनी चाहिए, न कि किसी पर आर्थिक बोझ डालने या विवाद पैदा करने के लिए। इन फैसलों का मुख्य लक्ष्य शादियों को सरल और विवाद मुक्त बनाना है।
मृत्यु भोज और कलेवा की रस्म में सादगी
केवल विवाह ही नहीं बल्कि मृत्यु जैसे शोक के समय पर भी समाज ने सादगी के नए मापदंड तय किए हैं। आमसभा में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि मृत्यु भोज के दौरान अब ‘कलेवा’ जैसी भारी और खर्चीली व्यवस्था की जगह साधारण भोजन ही परोसा जाएगा। समाज ने इस नियम का कड़ाई से पालन करवाने का संकल्प लिया है ताकि शोक संतप्त परिवार पर सामाजिक दबाव के कारण अतिरिक्त आर्थिक बोझ न आए।



