इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का हल्लाबोल, धरने पर बैठे 182 विशेषज्ञ

छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में इन दिनों कामकाज ठप पड़ा है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अपनी मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। करीब 182 वैज्ञानिक एक साथ हड़ताल पर चले गए हैं, जिससे शोध और किसानों से जुड़े तकनीकी कार्यों पर बुरा असर पड़ रहा है। वैज्ञानिकों का यह प्रदर्शन न केवल राजधानी रायपुर में, बल्कि प्रदेश के विभिन्न केंद्रों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

27 कृषि विज्ञान केंद्रों में लटका ताला

इस हड़ताल का व्यापक असर पूरे प्रदेश में देखने को मिल रहा है। जानकारी के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में संचालित 27 कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के वैज्ञानिक इस आंदोलन में शामिल हैं। 16 फरवरी से शुरू हुई यह हड़ताल 20 फरवरी तक चलने वाली है। वैज्ञानिकों के काम बंद करने से ग्रामीण स्तर पर किसानों को मिलने वाली तकनीकी सलाह और प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर ब्रेक लग गया है।

डेढ़ साल से वेतन का इंतजार और 7 सूत्रीय मांगें

आंदोलनकारी वैज्ञानिकों का सबसे बड़ा दर्द वेतन को लेकर है। विश्वविद्यालय के गेट पर धरने पर बैठे वैज्ञानिकों ने बताया कि पिछले डेढ़ साल से उन्हें पूरा वेतन नहीं दिया गया है। वेतन में की जा रही इस कटौती ने उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है। अपनी 7 सूत्रीय मांगों के जरिए वे न केवल वेतन विसंगति को दूर करने की मांग कर रहे हैं, बल्कि पदोन्नति और अन्य सेवा शर्तों में सुधार की भी अपील कर रहे हैं।

हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी का आरोप

वैज्ञानिकों का कहना है कि वे इस लड़ाई को कानूनी तौर पर भी जीत चुके हैं, लेकिन प्रशासन फिर भी अडिग है। धरने पर बैठे विशेषज्ञों ने दावा किया कि उनके वेतन और अधिकारों के मामले में हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया है। इसके बावजूद, विश्वविद्यालय प्रबंधन और संबंधित विभाग अदालती आदेशों को लागू करने में देरी कर रहा है। उनका कहना है कि जब न्याय के उच्चतम दरवाजे से राहत मिल चुकी है, तो फिर प्रशासन इसे लागू करने से क्यों कतरा रहा है।

अनिश्चितकालीन हड़ताल की दी सख्त चेतावनी

वर्तमान में चल रही यह 5 दिवसीय सांकेतिक हड़ताल एक बड़े आंदोलन की आहट मात्र है। वैज्ञानिकों ने स्पष्ट कर दिया है कि 20 फरवरी तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगले चरण में सभी 182 वैज्ञानिक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। अगर ऐसा होता है, तो प्रदेश की कृषि व्यवस्था और बीज उत्पादन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में बड़ा व्यवधान आ सकता है।

विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर जमे वैज्ञानिक

रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर वैज्ञानिक तंबू गाड़कर डटे हुए हैं। वे शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं और शासन-प्रशासन का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर खींच रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि वे भी किसानों की सेवा करना चाहते हैं, लेकिन खाली पेट और अधूरे वेतन के साथ काम करना अब संभव नहीं है। अब सबकी नजरें विश्वविद्यालय प्रबंधन और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।

Also Read: महिला आयोग की बड़ी कार्रवाई: नर्सों के वेतन में 80 लाख का घपला और छात्रा सुसाइड केस में कॉलेज पर शिकंजा

दक्षिण कोसल का Whatsapp Group ज्वाइन करे

Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

Related Articles

Back to top button