
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल (Modi Cabinet) की बैठक में एक बड़ा फैसला लिया गया है। दुनिया की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना मनरेगा (MGNREGA) का नाम बदल दिया गया है। इस योजना को अब ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना’ (Pujya Bapu Gramin Rozgar Yojana) कहा जाएगा। केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के साथ यह नया नाम तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
नाम बदलने का उद्देश्य: ग्रामीण रोजगार की नई पहचान
भारत सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) का नाम बदलने का यह निर्णय लिया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार नाम बदलने का मकसद इस योजना को नई पहचान देना और इसे ग्रामीण विकास की दिशा में और मजबूती से जोड़ना है। ‘पूज्य बापू’ शब्द महात्मा गांधी के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जाता है, जिससे योजना की सामाजिक भूमिका और व्यापक रूप से समझ में आएगी।
साल 2005 में NREGA के रूप में हुई थी शुरुआत
मनरेगा योजना को साल 2005 में लागू किया गया था। इसे मूल रूप से नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट (NREGA) कहा जाता था। बाद में इसे महात्मा गांधी के नाम से जोड़कर MGNREGA बना दिया गया। यह योजना भारत की प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में से एक है, जिसका लक्ष्य ग्रामीण परिवारों को प्रति वर्ष कम से कम 100 दिनों का रोजगार सुनिश्चित करना है।
योजना का मुख्य लक्ष्य: ग्रामीण आजीविका सुरक्षा
इस योजना का उद्देश्य यह है कि ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले इच्छुक वयस्कों को अकुशल मैन्युअल काम (Unskilled Manual Work) के रूप में रोजगार मिले। इससे उनकी आजीविका सुरक्षित रहे और वे आने वाले मुश्किल समय में आर्थिक रूप से सक्षम रहें। ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना’ नाम का चयन गांधीजी के ग्रामीण विकास और ग्राम स्वराज के महत्व को दर्शाता है।
नया नाम: ग्रामीण जीवन की गरिमा का प्रतीक
‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना’ नाम का चयन सीधे तौर पर महात्मा गांधी के प्रति गहरे सम्मान से जुड़ा है। गांधीजी को देश में ग्रामीण विकास और ग्राम स्वराज के विचार का प्रतीक माना जाता है। इस नए नाम से यह संदेश भी जाएगा कि यह योजना सिर्फ रोजगार ही नहीं देती, बल्कि ग्रामीण जीवन की गरिमा और स्वतंत्रता के मूल्यों में भी विश्वास रखती है।
ढांचे में कोई तत्काल बदलाव नहीं, भविष्य में संशोधन संभव
वर्तमान में उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय कैबिनेट ने सिर्फ योजना के नाम में ही बदलाव (Renaming) को मंजूरी दी है। योजना के नियम, रोजगार के दिनों की संख्या, मजदूरी दर, या अन्य लाभों में तत्काल कोई बड़ा बदलाव नहीं बताया गया है। हालांकि, कुछ सूत्रों में संकेत दिया गया है कि भविष्य में रोजगार गारंटी के दिनों को बढ़ाया जा सकता है और मजदूरी दरों को भी संशोधित किया जा सकता है ताकि ग्रामीण आजीविका और मजबूत हो सके।



