
रायपुर: रायपुर नगर निगम के भाजपा पार्षद कैलाश बेहरा को अनुकंपा के आधार पर भृत्य (चपरासी) के पद पर नियुक्ति दिए जाने के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। उनकी माँ, जो निगम की कर्मचारी थीं, उनके निधन के बाद शासन ने यह नियुक्ति आदेश 16 सितंबर 2025 को जारी किया। कांग्रेस ने इस फैसले को नियमों के पूरी तरह खिलाफ बताते हुए सरकार पर तीखा हमला किया है।

कांग्रेस का आरोप: ‘यह फैसला नियम विरुद्ध’
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इस नियुक्ति पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि यह सरकार का अनोखा कारनामा है और यह फैसला लगता है ‘भांग खाकर’ लिया गया है।
- नियमों की अवहेलना: दीपक बैज ने स्पष्ट किया कि किसी भी जनप्रतिनिधि को अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि कोई भी निर्वाचित प्रतिनिधि, चाहे वह किसी भी परिस्थिति में क्यों न हो, सरकारी सेवा में नियुक्त नहीं हो सकता। कांग्रेस ने इसे नियमों की सीधी अवहेलना बताया है।

संवैधानिक भूमिका पर सवाल
कैलाश बेहरा वर्तमान में रायपुर नगर निगम में भाजपा के पार्षद हैं, यानी वे निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं। अब उन्हें सरकारी कर्मचारी के तौर पर भृत्य के पद पर नियुक्त किया गया है।
- दोहरी भूमिका: यह दोहरी भूमिका न केवल संवैधानिक रूप से सवालों के घेरे में है, बल्कि प्रशासनिक नियमों के भी सीधे खिलाफ मानी जा रही है। नियमों के अनुसार, सरकारी सेवा में नियुक्ति के बाद उन्हें पार्षद का पद छोड़ना पड़ सकता है।

इस पूरे मामले को लेकर भाजपा पार्षद कैलाश बेहरा से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। यह नियुक्ति अब प्रशासन और सरकार की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रही है।



