
रायपुर। छत्तीसगढ़ के छोटे कस्बे पेंड्रा में जन्मे युवा राजशेखर पैरी का नाम अब वैश्विक स्पेस इंडस्ट्री में उभरता सितारा बन गया है। बिलासपुर जिले से ताल्लुक रखने वाले 30 वर्षीय राजशेखर को अमेरिका की निजी एयरोस्पेस कंपनी टाइटन स्पेस इंडस्ट्रीज (Titan Space Industries – TSI) ने अपने पहले मानव मिशन के लिए चुना है—एक कैरियर की ऊंचाई, जो न सिर्फ उनके व्यक्तिगत सफर में, बल्कि भारत और छत्तीसगढ़ के लिए भी गर्व का क्षण साबित हुई है। अंतरिक्षयान
यूके में शिक्षा और तकनीकी अनुभव से तैयार हुआ मिशन
राजशेखर वर्तमान में यूके में रहकर एयरोस्पेस और मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं और एक स्पेस टेक कंपनी ऑर्बिटालॉकर में प्रोजेक्ट मैनेजर (इंजीनियरिंग) की भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा, उन्होंने कम्प्यूटेशनल फ्लूइड डायनेमिक्स में इंटर्नशिप भी की है, जिससे उन्हें स्पेस टेक्नोलॉजी की गहराई से समझ मिली।
चयन से पहले सघन प्रशिक्षण और परीक्षण
इस मिशन में शामिल होने से पहले राजशेखर ने एनालॉग स्पेस वातावरण में प्रशिक्षण लिया—नकली चंद्र मिशन, सीमित ऑक्सीजन और उच्च दबाव की परिस्थितियों में काम करने जैसी चुनौतियों को पार करते हुए उन्होंने सभी मानदंड पूरे किए। इस कठिन प्रक्रिया ने उनकी मानसिक और शारीरिक तैयारियों को परखा।
चुनाव पर राजशेखर की प्रतिक्रिया

चयन की घोषणा पर राजशेखर ने कहा,
“यह सिर्फ मेरी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है—यह संकेत है कि भारत, यूके और दुनिया के युवा अब निजी स्पेस फ्लाइट कंपनियों में अपना स्थान बना रहे हैं। यह दिखाता है कि कड़ी मेहनत, दृढ़ इच्छाशक्ति और सही दिशा हमें किसी भी छोटे शहर से अंतरिक्ष तक पहुंचा सकती है।”
अंतरिक्ष में वैज्ञानिक प्रयोगों की भूमिका
टीएसआई की मानव उड़ान परियोजना के अंतर्गत उन्हें विशेष प्रशिक्षण मिलेगा। मिशन के दौरान राजशेखर न केवल पृथ्वी की निम्न कक्षा में प्रयोग करेंगे, बल्कि प्रणोदन, सेंसर डेटा और अन्य अनुसंधानों में भी सक्रिय भूमिका निभाएंगे, जिससे ऐसे टेक्नोलॉजी विकास को बढ़ावा मिलेगा।
प्रेरणादायक यात्रा: पेंड्रा से अंतरिक्ष तक
राजशेखर का जन्म और प्रारंभिक शिक्षा बिलासपुर के पेंड्रा कस्बे में हुई। 5वीं से 10वीं तक की पढ़ाई उन्होंने ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल, पेंड्रा रोड से की। उसके बाद हैदराबाद में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई की। एक दौर में उन्होंने भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (रक्षा मंत्रालय) में भी कार्य किया। बाद में यूके जाकर एयरोस्पेस प्रणोदन में विशेषज्ञता हासिल की।
निजी स्पेस उड़ानों में भारतीय युवाओं की भागीदारी
राजशेखर पैरी का चयन यह स्पष्ट संदेश देता है कि अब युवा केवल सरकारी एजेंसियों तक ही सीमित नहीं रहे। वे अंतरराष्ट्रीय निजी स्पेस प्रोजेक्ट्स में भी हिस्सा ले रहे हैं। उनकी कहानी यह दिखाती है कि दृढ़ संकल्प और समर्पण से किसी छोटे कस्बे से निकलकर भी अंतरिक्ष की सीमाओं तक पहुँचा जा सकता है।
राजशेखर पैरी की यह उपलब्धि न सिर्फ व्यक्तिगत दृढ़ता की कहानी है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ और भारत की अंतरिक्ष प्रतिभा की वैश्विक यात्रा की शुरुआत का प्रतीक भी है। यह युवा पीढ़ी को प्रेरित करता है कि योजनाबद्ध दृष्टिकोण और कठोर अभ्यास से दुनिया की कोई भी ऊँचाई पार की जा सकती है।



