
सिरपुर: दक्षिण कोसल की प्राचीन राजधानी और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पुरातात्विक स्थल सिरपुर के अच्छे दिन आने वाले हैं। केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने छत्तीसगढ़ के इस ऐतिहासिक केंद्र का एकदिवसीय दौरा किया। उनके साथ उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल भी मौजूद रहे। शेखावत ने महानदी के तट पर स्थित इन खंडहरों की भव्यता को करीब से देखा और इनके संरक्षण की दिशा में केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। मंत्री के इस दौरे को सिरपुर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
1953 से जारी है उत्खनन का सिलसिला: अब तक मिले 34 महत्वपूर्ण स्थल, अभी बहुत कुछ है बाकी
सिरपुर की पुरातात्विक यात्रा काफी पुरानी है। सबसे पहले 1953 में प्रोफेसर एम.जी. दीक्षित के नेतृत्व में यहां खुदाई शुरू हुई थी। इसके बाद 1999 से 2011 के बीच भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के प्रयासों से 34 बड़े पुरातात्विक और पर्यटन स्थल दुनिया के सामने आए। इनमें बौद्ध, हिंदू और जैन धर्मों से जुड़े प्राचीन मंदिर, विहार और बाजार शामिल हैं। हालांकि, जानकारों का मानना है कि सिरपुर की धरती में अभी भी कई रहस्य दबे हुए हैं और महानदी के किनारे के कई हिस्सों में उत्खनन कार्य किया जाना अब भी शेष है।
यूनेस्को की सूची के लिए दो दशक का इंतजार: सांसद रूपकुमारी चौधरी ने संसद में उठाई थी आवाज
सिरपुर को यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की कोशिशें पिछले 20 साल से चल रही हैं। महासमुंद की सांसद रूपकुमारी चौधरी ने इस मुद्दे को संसद के पटल पर पुरजोर तरीके से उठाया था, जिसके बाद केंद्रीय मंत्रालय की सक्रियता बढ़ी है। इतने वर्षों के प्रयासों के बावजूद तकनीकी कारणों और दस्तावेजों की कमी की वजह से सिरपुर को अब तक यह दर्जा नहीं मिल सका है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि केंद्र सरकार के दखल के बाद अब इस प्रक्रिया में तेजी आएगी और सिरपुर को वह सम्मान मिलेगा जिसका वह हकदार है।
पिछले 11 वर्षों में बदली देश की तस्वीर: शेखावत बोले- सिरपुर की दावेदारी को बनाएंगे और मजबूत
पुरातात्विक स्थलों के बारीकी से निरीक्षण के बाद गजेंद्र सिंह शेखावत ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि पिछले 11 सालों में भारत की कई ऐतिहासिक धरोहरों को विश्व विरासत सूची में जगह मिली है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सिरपुर की समृद्ध विरासत और यहां की अद्भुत वास्तुकला को देखते हुए इसे विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने के लिए मंत्रालय पूरी ताकत लगाएगा। मंत्री ने कहा कि यहां के प्राचीन साक्ष्य यह साबित करने के लिए काफी हैं कि यह क्षेत्र सदियों पहले ज्ञान और कला का एक बड़ा केंद्र हुआ करता था।
बौद्ध, हिंदू और जैन संस्कृतियों का संगम: पर्यटन केंद्र के रूप में संवारने की बड़ी योजना
सिरपुर केवल पत्थरों का ढांचा नहीं बल्कि सर्वधर्म समभाव का प्रतीक है। यहां मिले बुद्ध विहार और लक्ष्मण मंदिर जैसी संरचनाएं दुनिया भर के पर्यटकों और शोधकर्ताओं को अपनी ओर खींचती हैं। केंद्रीय मंत्री ने संकेत दिए कि केंद्र सरकार यहां पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाने और कनेक्टिविटी सुधारने के लिए बड़े फंड का प्रावधान कर सकती है। लक्ष्य यह है कि जब सिरपुर को विश्व धरोहर का टैग मिले, तब तक यहां का बुनियादी ढांचा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार हो जाए।
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