
महासमुंद जिले में छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति को लेकर करीब एक महीने से चल रहा गतिरोध अब शांत हो गया है। दरअसल, यह पूरा विवाद 28 नवंबर को तब शुरू हुआ जब छत्तीसगढ़ किसान मोर्चा के सदस्य नेशनल हाईवे-53 पर महतारी की प्रतिमा स्थापित करने की कोशिश कर रहे थे। हाईवे पेट्रोलिंग टीम की सूचना पर तुमगांव पुलिस मौके पर पहुंची और बिना अनुमति सड़क किनारे निर्माण कार्य करने पर रोक लगा दी। प्रशासन की मनाही के बावजूद जब प्रदर्शनकारी नहीं माने, तो पुलिस ने राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर मूर्ति को अपने कब्जे में ले लिया था।
प्रशासनिक सुरक्षा और कौवाझर पंचायत में रखी गई थी प्रतिमा
विवाद बढ़ने के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने जब्त की गई मूर्ति को कौवाझर ग्राम पंचायत की सुपुर्दगी में दे दिया था। वहां इसे सुरक्षा घेरे में रखा गया था ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति पैदा न हो। पुलिस की इस कार्रवाई का किसान मोर्चा ने कड़ा विरोध किया था और इसे अपनी आस्था और क्षेत्रीय अस्मिता का अपमान बताया था। संगठन का तर्क था कि वे अपनी संस्कृति के सम्मान में यह कदम उठा रहे थे, जबकि प्रशासन का कहना था कि सुरक्षा मानकों और यातायात व्यवस्था को देखते हुए बिना मंजूरी हाईवे पर ऐसी कोई गतिविधि नहीं की जा सकती।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की सुनवाई और सुपुर्दगी का आदेश
इस कानूनी लड़ाई का फैसला आखिरकार अदालत के जरिए हुआ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 23 दिसंबर को इस मामले की विस्तृत सुनवाई की। आवेदक अनिल दुबे की ओर से पेश किए गए जमानत मुचलके को अदालत ने स्वीकार कर लिया और तुमगांव पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए कि जब्त की गई प्रतिमा को सम्मानपूर्वक आवेदकों को वापस सौंप दिया जाए। कोर्ट के इस आदेश के बाद पुलिस और प्रशासन ने कानूनी प्रक्रिया पूरी की और मूर्ति की वापसी का रास्ता साफ हुआ।
गाजे-बाजे के साथ गांव में निकाली गई भव्य शोभायात्रा
अदालती आदेश के पालन में नायब तहसीलदार की मौजूदगी में तुमगांव पुलिस ने छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति किसान मोर्चा के सदस्यों को सौंप दी। मूर्ति वापस मिलते ही कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा गया। मोर्चा के सदस्यों ने इसे अपनी जीत बताया और बाजे-गाजे के साथ प्रतिमा को लेकर पूरे गांव में एक भव्य शोभायात्रा निकाली। ग्रामीणों ने भी जगह-जगह आरती उतारकर स्वागत किया। संगठन ने संकेत दिए हैं कि वे अब उचित कानूनी अनुमति लेकर ही मूर्ति को किसी उपयुक्त स्थान पर स्थापित करेंगे ताकि भविष्य में कोई कानूनी अड़चन न आए।



