
ईरान और इजरायल के बीच छिड़े युद्ध का असर अब छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में ईंधन की सप्लाई पर दिखने लगा है। वैश्विक तनाव के कारण पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने जिले में डीजल और पेट्रोल के वितरण को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य भविष्य में होने वाली तेल की किल्लत से निपटना और ईंधन के स्टॉक को सुरक्षित रखना है। इस आदेश के बाद अब आम नागरिकों और कारोबारियों को पहले की तरह आसानी से खुला डीजल नहीं मिल पाएगा।
डिब्बे में डीजल लेने पर लगी रोक: केवल वाहनों की टंकी में ही भरेगा तेल
बिलासपुर जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अब पेट्रोल पंपों पर किसी भी तरह के डिब्बे, गैलन या अन्य पात्र में डीजल या पेट्रोल नहीं दिया जाएगा। पंप संचालकों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे केवल वाहनों की टंकी में ही ईंधन भरें। यह नियम तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। प्रशासन का मानना है कि खुले में तेल की बिक्री पर रोक लगाने से इसकी कालाबाजारी और अनावश्यक भंडारण पर लगाम लगेगी। अगर किसी को बहुत जरूरी काम के लिए खुले में डीजल चाहिए, तो उसे संबंधित क्षेत्र के एसडीएम या तहसीलदार से लिखित अनुमति लेनी होगी।
खेती और उद्योगों के लिए नए नियम: औसत खपत के आधार पर ही मिलेगी सप्लाई
प्रशासन ने किसानों, जनरेटर संचालकों और छोटे उद्योगों के लिए डीजल की आपूर्ति पूरी तरह बंद नहीं की है, लेकिन उस पर कड़ी शर्तें लगा दी हैं। आदेश के मुताबिक, कृषि कार्यों और सूक्ष्म उद्योगों को उनकी पिछली औसत खपत के आधार पर ही डीजल दिया जाएगा। इसके लिए पंप संचालकों को एक अलग रिकॉर्ड रजिस्टर बनाना होगा, जिसमें खरीदार का नाम, मात्रा और उपयोग का विवरण दर्ज करना अनिवार्य होगा। इस कदम से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि खेती और जरूरी उत्पादन कार्य प्रभावित न हों, साथ ही तेल का दुरुपयोग भी न हो सके।
निगरानी के लिए जांच दल का गठन: सीसीटीवी से होगी पंपों की मॉनिटरिंग
कलेक्टर ने पेट्रोलियम पदार्थों के परिवहन और बिक्री पर विशेष नजर रखने के लिए एक उच्च स्तरीय जांच दल बनाया है। यह टीम जिलेभर के पेट्रोल पंपों का औचक निरीक्षण करेगी। पंप परिसरों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की नियमित जांच की जाएगी ताकि यह पता चल सके कि कहीं चोरी-छिपे डिब्बों में तेल तो नहीं दिया जा रहा। पेट्रोलियम पदार्थों के अवैध परिवहन या स्टॉक जमा करने वालों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें जेल और जुर्माना दोनों का प्रावधान है।
संवेदनशील सेवाओं को प्राथमिकता: संकट के समय स्टॉक बचाने की कवायद
ईरान-इजरायल युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई चेन में बड़े बदलाव की संभावना है। इसी संवेदनशीलता को देखते हुए बिलासपुर प्रशासन ने बुनियादी और आपातकालीन सेवाओं (जैसे एम्बुलेंस, दमकल और पुलिस वाहन) के लिए डीजल का कोटा आरक्षित रखने की रणनीति बनाई है। किसी भी बड़े उद्योग को विशेष परिस्थितियों को छोड़कर अतिरिक्त डीजल की आपूर्ति नहीं की जाएगी। सरकार का प्रयास है कि आम जनता को दैनिक आवाजाही में किसी भी तरह की किल्लत का सामना न करना पड़े।
जनता से सहयोग की अपील: अफवाहों से बचने और सुचारू व्यवस्था में मदद की मांग
खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग के निर्देशों के बाद लागू हुए इस आदेश को लेकर प्रशासन ने नागरिकों से सहयोग मांगा है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि यह पाबंदियां केवल ईंधन के संभावित संकट को रोकने और सुचारू वितरण सुनिश्चित करने के लिए हैं। लोगों को पैनिक बाइंग (घबराहट में ज्यादा तेल खरीदना) से बचने की सलाह दी गई है। जिले के सभी पेट्रोल पंपों पर इस आदेश की प्रति चस्पा करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि ग्राहकों को नियमों की सही जानकारी मिल सके और वे पंप कर्मचारियों के साथ विवाद न करें।
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