
महासमुंद: जिले की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों पर ब्रेक लगने से पंचायत प्रतिनिधियों का धैर्य जवाब दे गया है। सोमवार को जिले भर के सरपंच, जनपद सदस्य और जिला पंचायत सदस्य एकजुट होकर सड़क पर उतर आए। 15वें वित्त आयोग की साल 2025-26 की मूलभूत राशि अब तक जारी नहीं होने के विरोध में प्रतिनिधियों ने जनपद पंचायत परिसर से जिला पंचायत कार्यालय तक विशाल रैली निकाली। जिला पंचायत सीईओ को ज्ञापन सौंपते हुए जनप्रतिनिधियों ने अपनी नाराजगी जताई और सरकार से जल्द से जल्द बजट आवंटन की मांग की। उनका कहना है कि फंड के अभाव में गांव की सरकार चलाना अब उनके लिए चुनौती बन गया है।
पेयजल और साफ-सफाई पर संकट: मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे ग्रामीण
पंचायत प्रतिनिधियों ने बताया कि 15वें वित्त की राशि न मिलने का सीधा असर गांव की बुनियादी सुविधाओं पर पड़ रहा है। पंचायतों में नालियों की साफ-सफाई, पेयजल व्यवस्था, खराब स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत और छोटे-मोटे निर्माण कार्य पूरी तरह बंद हो चुके हैं। प्रतिनिधियों का आरोप है कि बजट न होने से गांवों में गंदगी बढ़ रही है और अंधेरा पसरा हुआ है, जिससे आम जनता को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इससे न केवल गांव का विकास रुक गया है, बल्कि पंचायती राज संस्थाओं की साख पर भी बट्टा लग रहा है।

गणतंत्र दिवस की तैयारियों पर भी संशय: 26 जनवरी के आयोजन के लिए नहीं है पैसा
सरपंचों ने एक बड़ी चिंता 26 जनवरी को लेकर जाहिर की है। उनका कहना है कि गणतंत्र दिवस के अवसर पर गांवों में ध्वजारोहण, स्कूलों में सजावट, स्वच्छता अभियान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए पंचायतों के पास फूटी कौड़ी भी नहीं है। आमतौर पर पिछले वर्षों में 15 अगस्त से पहले ही इस मद की राशि मिल जाया करती थी, लेकिन इस बार साल खत्म होने को है और अब तक खजाना खाली है। ऐसे में राष्ट्रीय पर्व के आयोजन को लेकर पंचायत प्रतिनिधि असमंजस की स्थिति में हैं।
आर-पार की जंग की चेतावनी: मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेंगे प्रतिनिधि
ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रतिनिधियों ने शासन-प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि यदि जल्द ही राशि आवंटन का प्रस्ताव शासन को नहीं भेजा गया और फंड रिलीज नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। पंचायत प्रतिनिधियों ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर राजधानी रायपुर कूच करेंगे और मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेंगे। प्रतिनिधियों का कहना है कि वे गांवों में विकास के लिए जनता के प्रति जवाबदेह हैं, लेकिन सरकार के ढीले रवैये के कारण उन्हें लोगों की नाराजगी झेलनी पड़ रही है।



