
CG Ration Update: रायपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में राशन कार्ड धारकों को इस महीने भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। फरवरी और मार्च का दो महीने का चावल एक साथ बांटने का सरकारी आदेश तो जारी हो गया है, लेकिन हकीकत में वितरण शुरू ही नहीं हो पाया है। राशन दुकानों की ई-पॉस मशीनें अपडेट न होने के कारण सॉफ्टवेयर काम नहीं कर रहा है। 1 फरवरी से ही लोग दुकानों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन तकनीकी खराबी की वजह से उन्हें खाली हाथ घर लौटना पड़ रहा है।
स्टेट और सेंट्रल कोटे के पेंच में फंसे दुकानदार
इस बार राशन वितरण की प्रक्रिया को नए नियमों ने काफी पेचीदा बना दिया है। खाद्य संचालनालय के निर्देशानुसार, दो महीने का अतिरिक्त चावल केवल ‘स्टेट कोटे’ के तहत ही दिया जाना है, जबकि ‘सेंट्रल कोटे’ का वितरण फिलहाल नहीं होगा। मशीनों में अब तक इस बदलाव की एंट्री नहीं हुई है, जिससे दुकानदारों को यह समझ नहीं आ रहा कि किस कार्ड पर कितना राशन देना है। जब तक एनआईसी की ओर से सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं होता, तब तक वितरण प्रक्रिया पूरी तरह रुकी रहेगी।
बीपीएल और एपीएल के लिए अलग-अलग नियम
Ration Card Problem: सरकार ने राशन वितरण के लिए स्पष्ट वर्गीकरण किया है, जिसके तहत बीपीएल (गरीबी रेखा के नीचे) परिवारों को दो महीने का चावल मिलेगा। वहीं, एपीएल (सामान्य) कार्ड धारकों को केवल एक महीने का ही राशन दिया जाना है। हालांकि, सॉफ्टवेयर की खराबी का असर सभी श्रेणियों पर पड़ रहा है। दुकानों पर पहुंचने वाले एपीएल परिवार भी सर्वर ठप होने के कारण अपना हक नहीं ले पा रहे हैं। दुकानदारों ने इस समस्या को लेकर विभाग के आला अधिकारियों को जानकारी दी है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है।
दुकानदारों को सता रहा हंगामे का डर
रायपुर कोर पीडीएस संघ के अध्यक्ष नरेश बाफना का कहना है कि नियमों के इस फेरबदल से आने वाले दिनों में दुकानों पर स्थिति तनावपूर्ण हो सकती है। सेंट्रल कोटे का चावल न मिलने पर आम जनता के बीच नाराजगी बढ़ने की आशंका है। चूंकि हर एक किलो चावल की ऑनलाइन एंट्री अनिवार्य है, इसलिए दुकानदार मैन्युअल तरीके से वितरण नहीं कर सकते। बिना अपडेटेड मशीन के काम शुरू करने पर स्टॉक के मिलान में भारी गड़बड़ी होने का खतरा बना हुआ है।
तकनीकी सुधार के इंतजार में खाद्य विभाग
खाद्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सॉफ्टवेयर अपडेट करने का जिम्मा एनआईसी के पास है और तकनीकी टीम इस पर काम कर रही है। जब तक हर राशन कार्ड की पात्रता मशीन में नहीं दिखेगी, तब तक पारदर्शी वितरण संभव नहीं है। दूसरी ओर, कड़ाके की धूप और उम्मीद के साथ राशन दुकानों पर पहुंच रहे बुजुर्गों और मजदूरों के लिए यह इंतजार भारी पड़ रहा है। अब सबकी नजरें विभाग पर टिकी हैं कि कब तकनीकी खामी दूर होती है और लोगों के चूल्हे जल पाते हैं।



